रुद्रपुर। उत्तराखंड के सरकारी विद्यालयों में कक्षा 9 से 12 तक संचालित व्यावसायिक शिक्षा योजना के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। युवाओं को रोजगारपरक कौशल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई यह योजना 1 अप्रैल 2026 से ठप पड़ी है, जिससे हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई और भविष्य प्रभावित हो रहा है।
उत्तराखंड कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. गणेश उपाध्याय ने बताया कि इस योजना में 60 प्रतिशत व्यय भारत सरकार तथा 40 प्रतिशत व्यय उत्तराखंड सरकार वहन करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की अनदेखी और प्रशासनिक शिथिलता के कारण योजना प्रभावित हो गई है।
इस संबंध में जिला मुख्य शिक्षा अधिकारी हरेंद्र मिश्रा से बातचीत करने पर उन्होंने बताया कि योजना को शीघ्र पुनः प्रारंभ करने की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही इसका संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
डॉ. उपाध्याय ने सरकार से कई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछते हुए कहा कि जनता और विद्यार्थियों को यह जानने का अधिकार है कि व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम बंद होने के वास्तविक कारण क्या हैं? क्या Vision India को दिया गया कार्यादेश अभी प्रभावी है या नहीं? यदि अनुबंध समाप्त हो चुका है तो नई एजेंसी का चयन कब तक किया जाएगा? योजना के लिए अब तक कितनी धनराशि प्राप्त हुई और उसमें से कितनी खर्च की गई? प्रदेश के कितने विद्यालय और कितने विद्यार्थी इससे प्रभावित हुए हैं? क्या प्रशिक्षकों का मानदेय बकाया है और उसका भुगतान कब तक किया जाएगा? साथ ही सरकार इस योजना को पुनः कब से शुरू करेगी?
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति और कौशल विकास के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए सरकार को तत्काल आवश्यक कदम उठाने चाहिए। व्यावसायिक शिक्षा विद्यार्थियों को रोजगार के लिए तैयार करने का महत्वपूर्ण माध्यम है और इसका लंबे समय तक बंद रहना प्रदेश के युवाओं के हित में नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार जल्द ही इस योजना को पुनः संचालित कर विद्यार्थियों और प्रशिक्षकों को राहत प्रदान करेगी।
