शिक्षक दिवस पर कविता
विद्या-ज्ञान की ज्योति, शिक्षक जग में जलाते हैं,
ऋषियों की ज्ञान-धरोहर, पीढ़ियों तक पहुँचाते हैं।
विक्षेप मिटाते विवेक से, संस्कारों को सजाते हैं,
सद्गुण और सद्धर्म से, सत्पथ पर चलाते हैं।
मन, बुद्धि, चित्त और अहं को, शिक्षक ही सँवारते हैं,
अज्ञान का तम हरकर, ज्ञान के दीप जलाते हैं।
ऋषिऋण से उऋण होने का, शिक्षक पथ दिखाते हैं,
धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष का, जीवन-मर्म बताते हैं।
जाति नहीं, योग्यता से, शिक्षक पहचान बनाते हैं,
शिक्षा से आत्मोत्थान हो, सृजन महान रचाते हैं।
ब्रह्मचर्य की साधना में, गुण-कौशल पढ़ाते हैं,
शिक्षक शुभ संस्कारों से, श्रेष्ठ हमें गढ़ाते हैं।
विस्मृति से जगा हमें, आत्मस्मृति तक लाते हैं,
सत्ज्ञान से शिक्षक, सचेतना का दीप जलाते हैं।
शिक्षक दिवस पर अर्पित, श्रद्धा-सुमन चढ़ाते हैं,
ऐसे ज्ञानी शिक्षक को, हम शत-शत शीश नवाते हैं।
सादर आभार।
नरेंद्र रावत ‘नरेन’
संस्थापक एवं मार्गदर्शक
साहित्यिक सचेतना एवं स्वास्तिक पत्रिका
