गुरुग्राम, 5 सितंबर। शिक्षक दिवस के अवसर पर सामाजिक, आध्यात्मिक एवं साहित्यिक संस्था सचेतना के साहित्यिक मंच साहित्यिक सचेतना द्वारा ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े कवियों एवं साहित्यकारों ने शिक्षक के प्रति श्रद्धा, सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त करते हुए अपनी भावपूर्ण रचनाएँ प्रस्तुत कीं।
साहित्यिक सचेतना के संस्थापक एवं मार्गदर्शक गुरूदेव नरेंद्र रावत ‘नरेन’ जी ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षक केवल विषय का ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि ज्ञान को विवेक, शिक्षा को संस्कार और गुणों को धर्म में रूपांतरित कर जीवन को सही दिशा देने वाला चेतना-निर्माता है। सनातन दृष्टि में शिक्षा का उद्देश्य केवल जीविकोपार्जन नहीं, बल्कि मन, बुद्धि, चित्त एवं अहंकार का परिष्कार, चरित्र निर्माण और आत्मोन्नति है। उन्होंने कहा कि शिक्षा से गुण, गुण से धर्म और धर्म से जीवन के पुरुषार्थ सार्थक होते हैं; शिक्षक ज्ञान की उस ज्योति को प्रज्वलित करता है, जो एक विद्यार्थी से आगे बढ़कर पूरी पीढ़ी की चेतना को प्रकाशित करती है।
सचेतना विगत चार वर्षों से आत्मोन्नति, नैतिक सुधार, संस्कार जागरण तथा सनातन जीवन-मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर सामाजिक, आध्यात्मिक एवं साहित्यिक गतिविधियों के माध्यम से कार्य कर रही है।
गोष्ठी का कुशल संचालन संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सम्पादिका प्रीति डिमरी ‘प्रीत’ ने किया। उन्होंने सभी रचनाकारों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए शिक्षक के प्रति सम्मान और कृतज्ञता को जीवन के संस्कार के रूप में अपनाने का आह्वान किया।
गोष्ठी में प्रतिभागी रचनाकार:
नरेंद्र रावत ‘नरेन’, प्रीति डिमरी ‘प्रीत’, उर्मिला पपनोई, स्मृति मिश्रा, एस.के. बाजपेयी, शारदा ओझा, किरण कांडपाल, मंगेश सिंह, मीरा मोहन, दीपा नेगी बिष्ट एवं सतरूपा मिश्रा।
