रिपोर्टर अश्वनी दीक्षित
खबर पड़ताल
सितारगंज धान खरीद सत्र 2026-27 शुरू होने से पहले राइस मिलर्स ने शासन-प्रशासन के सामने अपनी लंबित मांगों को लेकर आर-पार की चेतावनी दे दी है। सितारगंज राइस मिलर्स एसोसिएशन ने दो टूक कहा है कि जब तक वर्षों से अटके करीब पांच करोड़ रुपये के भुगतान समेत चार प्रमुख मांगों का समाधान नहीं होता, तब तक राइस मिलर्स आगामी धान खरीद सत्र के लिए सरकारी अनुबंध पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे। एसोसिएशन अध्यक्ष सौरभ सिंघल के नेतृत्व में राइस मिलर्स ने तहसीलदार हिमांशु जोशी को ज्ञापन सौंपकर जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर एवं कुमाऊं मंडल के अधिकारियों तक अपनी मांग पहुंचाई। एसोसिएशन के अनुसार चार सितंबर को रुद्रपुर के होटल सोनिया में उत्तराखंड प्रदेश राइस मिलर्स एसोसिएशन की महत्वपूर्ण बैठक हुई थी, जिसमें प्रदेशभर के राइस मिलर्स एवं पदाधिकारियों ने धान खरीद व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं पर गंभीर मंथन करते हुए सर्वसम्मति से चार सूत्रीय मांगों को लेकर निर्णायक रुख अपनाया। मिलर्स की पहली और सबसे अहम मांग वर्ष 2019 से 2026 तक लंबित करीब पांच करोड़ रुपये के समस्त बकाये का तत्काल भुगतान किए जाने की है। उनका कहना है कि लंबे समय से सरकारी भुगतान लंबित रहने के कारण राइस मिलर्स की बड़ी पूंजी फंसी हुई है, जिससे कारोबार पर दबाव बढ़ने के साथ आगामी धान खरीद सत्र की तैयारियां भी प्रभावित हो रही हैं। दूसरी ओर वर्ष 2025-26 के करीब सात लाख टन कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) के सरकारी गोदामों से तत्काल उठान की मांग की गई है। मिलर्स का कहना है कि तैयार चावल का समय पर उठान न होने से मिलों में भंडारण क्षमता का संकट पैदा हो रहा है और नई धान खरीद के लिए जगह बनाने में भी परेशानी सामने आ रही है। तीसरी मांग वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक राइस मिलर्स से लिया गया 0.5 प्रतिशत मंडी शुल्क वापस करने की है। इसके साथ ही चौथी मांग आगामी धान खरीद सत्र के लिए मंडी शुल्क व्यवस्था को लेकर स्पष्ट नीति तय करने तथा शुल्क का भुगतान सीधे संबंधित खाते से किए जाने की है। राइस मिलर्स ने साफ किया कि धान खरीद व्यवस्था में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन वर्षों से लंबित वित्तीय मामलों और अस्पष्ट शुल्क व्यवस्था के बीच उनके लिए नए सत्र में आगे बढ़ना मुश्किल है। एसोसिएशन ने प्रशासन को चेताया कि यदि धान खरीद शुरू होने से पहले चारों मुद्दों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो राइस मिलर्स की सरकारी खरीद व्यवस्था में भागीदारी प्रभावित हो सकती है। मिलर्स ने कहा कि उनका उद्देश्य सरकारी धान खरीद व्यवस्था को बाधित करना नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही समस्याओं का स्थायी समाधान कर व्यवस्था को पारदर्शी और सुचारू बनाना है। अब गेंद शासन-प्रशासन के पाले में है और धान खरीद सत्र शुरू होने से पहले इन मांगों पर होने वाली कार्रवाई पर राइस मिलर्स के अगले कदम की नजर रहेगी। ज्ञापन देने वालों में एसोसिएशन अध्यक्ष सौरभ सिंघल, महामंत्री दर्पण खुराना, विनय मित्तल, विनोद मित्तल, सुरेश अग्रवाल, पुनीत गोयल, अनिल सिंघल, ऋषभ गोयल, श्याम किशन गुप्ता समेत क्षेत्र के कई राइस मिलर्स मौजूद रहे।
