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दिल्ली पब्लिक स्कूल रुद्रपुर में जापानी भाषा पर आधारित एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सभा का उद्देश्य विद्यार्थियों को जापान की भाषा, संस्कृति और अनुशासन से परिचित कराना था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री भगत सिंह कोश्यारी जी, पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार एवं पूर्व राज्यपाल महाराष्ट्र, थे। विशिष्ट अतिथि श्री विकास शर्मा जी, मेयर नगर निगम रुद्रपुर तथा श्री कोजी सतो जी, अध्यक्ष जापान फाउंडेशन, नई दिल्ली, उपस्थित रहे। सभी अतिथियों का विद्यालय द्वारा उत्तराखंड की पहचान पारंपरिक पिछौड़ा भेंट कर स्वागत किया गया। इसके पश्चात कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना एवं प्रसिद्ध जापानी संगीत के साथ की गई।
इसके बाद विद्यार्थियों ने जापानी भाषा एवं संस्कृति पर आधारित विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें जापानी गीत-संगीत, प्रसिद्ध जापानी थिएटर तथा पारंपरिक प्रस्तुतियाँ शामिल रहीं। इसके साथ ही जापान की संस्कृति, तकनीकी प्रगति और वहाँ के अनुशासन पर रोचक जानकारी भी साझा की गई। कुछ विद्यार्थियों ने पारंपरिक जापानी परिधान एवं कला शैली का सुंदर प्रदर्शन किया।
विद्यार्थियों ने जापानी प्रतिनिधियों एवं अन्य अतिथियों के मार्गदर्शन में ओरिगामी, कैलिग्राफी तथा जापानी व्यंजन बनाने जैसी गतिविधियों में भी भाग लिया। विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए जापानी व्यंजनों और सांस्कृतिक गतिविधियों ने विद्यालय में जापानी संस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत की। इन गतिविधियों ने विद्यार्थियों को जापान की परंपराओं, कला एवं संस्कृति को निकट से समझने का अवसर प्रदान किया।
मुख्य अतिथि श्री भगत सिंह कोश्यारी जी ने अपने भाषण में कहा कि नई भाषाएँ सीखने से ज्ञान बढ़ता है और विभिन्न देशों की संस्कृति को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने दिल्ली पब्लिक स्कूल रुद्रपुर के छात्रों द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की प्रशंसा की तथा आमंत्रण के लिए विद्यालय का धन्यवाद किया।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के चेयरमैन श्री सुरजीत सिंह ग्रोवर जी ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी गतिविधियाँ बच्चों के आत्मविश्वास और वैश्विक दृष्टिकोण को विकसित करती हैं तथा छात्रों को सीखने के लिए नए अवसर प्रदान करती हैं। उन्होंने बताया कि छात्रों को और बेहतर तरीके से सीखने हेतु विद्यालय में स्किल लैब का भी उद्घाटन किया जा चुका है।
पूरा कार्यक्रम उत्साह, अनुशासन और सीखने की भावना से भरपूर रहा। विद्यार्थियों ने इस अनोखी प्रस्तुति का आनंद लिया और जापानी भाषा एवं संस्कृति के प्रति अपनी रुचि व्यक्त की।

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