रिपोर्टर अश्वनी दीक्षित
खबर पड़ताल
सितारगंज। विधानसभा की ग्राम पंचायत कठर्रा गऊघाट में कुछ दिन पूर्व चेहल्लुम पर्व पर आयोजित दंगल के दौरान हुए मारपीट का मामला अब एक बार फिर सुर्खियों में है। दोनों पक्षों पर मुकदमा दर्ज होने के बाद उच्च न्यायालय की शरण ली गई थी हाईकोर्ट नें पूर्व प्रधान पति तौफीक अहमद की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल रिट याचिका खारिज कर दी हैं । जिसके बाद मौजूदा प्रधान पति सरताज अली उर्फ गुड्डू नें अपने पक्ष में इसे अपने लिए बड़ी कानूनी राहत बताया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया निचली अदालत में जारी रहने का रास्ता साफ हो गया हैं जानकारी के अनुसार बीते दिनों चेहल्लम में दंगल के दौरान दोनों पक्षों में विवाद के बाद मारपीट हुई थी, जिसमें प्रधान पति सरताज अली उर्फ गुड्डू पक्ष के कई लोग घायल हुए थे। घायलों को सरकारी और निजी अस्पतालों में उपचार हुआ था। घटना के बाद दोनों पक्षों की ओर से कोतवाली में मुकदमे दर्ज कराए गए थे।
प्रधान पति सरताज अली के पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया कि दंगल के दौरान उनके पक्ष के लोगों पर जानलेवा हमला किया गया। पक्ष का यह भी आरोप है कि घटना के बाद पूरे प्रकरण को दूसरी दिशा देने का प्रयास किया गया तथा दूसरे पक्ष की ओर से अपने ही पक्ष के एक व्यक्ति को धारदार ब्लेड से चोट पहुंचाकर अलग मुकदमा दर्ज कराया गया। हालांकि इन आरोपों की अंतिम कानूनी पुष्टि न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर ही होगी अब हाईकोर्ट द्वारा तौफीक अहमद की रिट याचिका खारिज होने के बाद प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर खड़ा हो गया है। जानलेवा हमले के आरोपों में नामजद आरोपियों के खिलाफ पुलिस कब और किस स्तर पर कार्रवाई करती है, इस पर क्षेत्र की नजरें टिकी हुईं हैं। फिलहाल पुलिस की ओर अभी तक गिरफ्तारियां नहीं की गई हैं। सरताज अली उर्फ गुड्डू पक्ष ने कहा कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है और मामले में कानून के मुताबिक निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए। पक्ष ने प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए कलकत्ता चौकी प्रभारी विजय कुमार, कोतवाली किच्छा तथा क्षेत्राधिकारी सितारगंज का आभार जताया है।सरताज अली उर्फ गुड्डू पक्ष ने क्षेत्र के युवाओं और सामाजिक लोगों से अफवाहों से बचने, संयम बनाए रखने और आपसी भाईचारा कायम रखने की अपील की है। पक्ष का कहना है कि किसी भी विवाद का समाधान सड़क पर नहीं, बल्कि कानून और न्यायालय की प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए
