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रिपोर्टर अश्वनी दीक्षित
खबर पड़ताल

मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर जोर
SDH सितारगंज में बैठक, संस्थागत प्रसव बढ़ाने और मातृ मृत्यु दर कम करने पर हुई चर्चा सितारगंज, 10 सितंबर। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ऊधम सिंह नगर के निर्देश पर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने, संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने तथा मातृ मृत्यु दर कम करने के उद्देश्य से गुरुवार को उप जिला चिकित्सालय (SDH) सितारगंज में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई बैठक में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा सिद्दीकी, जनरल सर्जन डॉ. महिमा रावत, एनेस्थेटिस्ट डॉ. भाव्या तथा लेडी मेडिकल ऑफिसर डॉ. संदीप कौर, डॉ. स्वाति शर्मा, डॉ. देवांशी एवं डॉ. ख्याति सिंह ने प्रतिभाग किया बैठक में सितारगंज, नानकमत्ता एवं शक्तिफार्म क्षेत्र में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की गई। ANC जांच, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान, संस्थागत प्रसव, आपातकालीन प्रसूति सेवाएं, समयबद्ध रेफरल और प्रसवोत्तर देखभाल को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों से प्रत्येक गर्भवती महिला का समय से पंजीकरण, नियमित जांच एवं फॉलोअप सुनिश्चित करने को कहा गया। हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की शीघ्र पहचान कर उनका विशेष निगरानी एवं आवश्यकता पड़ने पर उच्च स्वास्थ्य केंद्र में समय से रेफरल सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।बैठक में ANM और ASHA कार्यकर्ताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए गर्भवती महिलाओं की सूची अद्यतन रखने, संभावित प्रसव तिथि पर निगरानी रखने तथा अत्यधिक रक्तस्राव, तेज सिरदर्द, धुंधला दिखाई देना, अत्यधिक सूजन, तेज बुखार, पेट दर्द और भ्रूण की गतिविधियां कम होने जैसे खतरे के संकेतों पर तत्काल स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क कराने के निर्देश दिए गए इसके अलावा SDH सितारगंज में उपलब्ध 24×7 प्रसूति एवं आपातकालीन सेवाओं के प्रभावी उपयोग तथा CHC नानकमत्ता और CHC शक्तिफार्म से मरीजों के समयबद्ध रेफरल एवं पूर्व सूचना व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी चर्चा हुई बैठक में प्रसव के बाद महिलाओं की निगरानी, प्रसवोत्तर रक्तस्राव, संक्रमण एवं उच्च रक्तचाप जैसी जटिलताओं की रोकथाम तथा परिवारों को जागरूक करने पर भी विशेष बल दिया गया।बैठक का मुख्य उद्देश्य “हर गर्भवती की पहचान, समय पर जांच, हाई रिस्क की शीघ्र पहचान, समय पर रेफरल, संस्थागत प्रसव और सुरक्षित मातृत्व” की व्यवस्था को मजबूत करना रहा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा मातृ मृत्यु को न्यूनतम करने के लिए चिकित्सकों, ANM, ASHA एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के समन्वित प्रयासों पर जोर दिया गया।

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