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बालक की प्रथम गुरु मां होती है तत्पश्चात वह गुरुकुल, स्कूल, कालेज, में पढ़ने जाता है वहां अनेक शिक्षकों से शिक्षा ग्रहण करता है जिससे वह भौतिक जीवन में अच्छी नौकरी या व्यवसाय कर अर्थो-पार्जन कर अपने जीवन को खुशहाल बनाकर परिवार का भरण-पोषण कर सके व समाज में सम्मान के साथ जिंदगी बसर कर सके परंतु इसके साथ-साथ ही वह अपने जीवन के असली अर्थ से रूबरू हो सके व आध्यात्मिक उन्नति कर सके कि वह कौन है व किसलिए इस संसार में आया है वह यहां आकर क्या कर रहा है उसके जीवन का असली उद्देश्य, मकसद क्या है,, इसके लिए उसे समय के सदगुरु से उसका मिलाप जरूरी होता है जब वह कृपा-कर मिलते हैं तो उनकी कृपा से वह अपने सेवक को गुरू दीक्षा देकर उसे निहाल करते हैं उसका जीवन बदल देते हैं मानव जन्म लेने का असली मकसद समझाते हैं व हर प्रकार से उसे भक्ति के योग्य बनाते हैं गुरु शब्द का अर्थ ही है जो हमें अंधकार से प्रकाश की और ले चले ।वह अपने शिष्य को भक्ति-सत्संग व सेवा का सहारा देकर उसके मन से काम, क्रोध,मोह, मद, मत्सर आदि विषयों -विकारों का नाश कर उसके मन को निर्मल व पवित्र बनाकर उसका लोक -परलोक सुहेला बनाते हैं व भवबंधन से छुड़ाते है । संतवाणी भी कहती हैं ,, ,,साधसंगत में चांदना सकल अंधेरा और सहजों दुर्लभ पाइये सत्संगत में ठौर,,।। सहजोबाई कहती हैं राम तजू पर गुरु न बिसारूं,,, क्योंकि ईश्वर ने तो केवल इस संसार में जन्म दिया है लेकिन गुरू ने आवागमन के चक्कर से मुक्त किया है गुरु पूर्णिमा आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाये जाने वाली विशेष तिथि है यह गुरु-शिष्य के पवित्र रिश्ते को समर्पित है महाभारत ग्रंथ व चारों वेदों के रचयिता महान ऋषि गुरु वेद- व्यासजी की इस दिन जन्म-दिवस होता है गुरु पूर्णिमा अपने आध्यात्मिक, धार्मिक और शैक्षणिक गुरुओं के प्रति आभार व सम्मान व्यक्त करने के लिए मनायी जाती है जिन्होने जीवन के हर कठिन मोड़ पर अपने शिष्यो का मार्गदर्शन किया।।, कबीरदास जी कहते है,, गुरु गोविंद दोउ खड़े काके लागूं पाय बलिहारी गुरु आपने जिन गोविंद दियो बताए।।,,कबीर सोया क्या करे जागन की कर चौप,यह दम हीरा लाल है पल-पल गुरु को सौंप।।
ज्ञान का दीपक जलाया आपने, अंधेरो से हमें निकाला आपने।। धर्म ,शिक्षा व संस्कार का पाठ पढ़ाकर।। जीवन को सफल बनाया आपने।।
गुरु पूर्णिमा पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🙏
प्रस्तुति –नरेश छाबड़ा आवास-विकास रूद्रपुर 8630769754

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