16कला सम्पूर्ण-अवतार योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण जिसमें ज्ञान,शाक्ति, बल,वीरता, धैर्य, कीर्ति,श्री, वाणी, रूप,कला, कौशल, नीति,दान,क्षमा,सत्य,सर्वज्ञता आदि 16कलाएं विद्यमान थी। उनका जन्म भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को हुआ था वे भगवान विष्णु के आठवें अवतार थे प्रेम, करूणा,व दया के प्रतीक माने गये हैं गोकुल व वृंदावन में बाल लीलाएं की तथा उनका जन्म धर्म की स्थापना और दुष्टों का संहार के लिए हुआ। सम्पूर्ण मानवता को निष्काम कर्मयोग ज्ञानयोग व भक्ति-योग का मार्ग दिखाया महाभारत के युद्ध में अर्जुन के सारथी बने व कुरुक्षेत्र के मैदान में अपने प्रिय सखा अनुपम धनुर्धर अर्जुन को गीता का उपदेश दिया,भगवत गीता ग्रंथ कर्म व धर्म के मार्ग पर चलने का मार्गदर्शक ग्रंथ बना श्री कृष्णाजन्माष्टमी हिन्दूओं का प्रमुख व पवित्र त्यौहार है इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं व मध्यरात्रि को कृष्ण जन्मोत्सव की खुशियां व उत्साह श्रद्धालुओं में देखते ही बनता है अपने इष्ट के प्रति श्रद्धा व्यक्त कर भजन संकीर्तन करते हैं व प्रसाद- मिष्ठान वितरण करते हैं भगवान की मूर्तियो मंदिर,घरो, बाजारो सुंदरता से सजाया जाता है शोभायात्रा व भगवान की सुंदर-झांकियों का दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं भगवान श्री कृष्ण ने अपने हर काम व आचरण में हमेशा सन्तुलन बनाए रखा ।जीवन में हमेशा त्याग बना रहा कभी गोकुल छूटा कभी मथुरा जीवन के हर मोड़ में बहुत सहज व सहनशील रहें। श्री कृष्ण भक्तों में मीरा बाई, सूरदास, धन्ना जट्ट, कृष्ण -गोपी, कृष्ण- राधा प्रेम उल्लेखनीय है जिन्होने अपने जीवन में श्रीकृष्णाचरणामृत का पान कर अपने जीवन को धन्य बनाया व प्रभु का सानिध्य प्राप्त किया
प्रस्तुति –नरेश छाबड़ा
आवास-विकास रूद्रपुर
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