उत्तराखंड सरकार और जिला प्रशासन उधम सिंह नगर की उदासीनता के कारण पराग फॉर्म में धान की फसल समय पर नहीं काटी गई, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। कई किसान दबाव में आकर हार्ट अटैक से मृत्यु भी हो चुकी है ।यह देखकर दुख होता है कि सरकार और प्रशासन ने हाई कोर्ट में सही तरह से पैरवी कर दिए होते आज किसान नही पिसता। जिन किसानों ने परागफॉर्म मालिकों से जमीन ठेके पर लेकर खेती की है, वे भारी कर्ज के बोझ तले दब गए हैं। उनके बच्चों की शिक्षा पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है। सितारगंज के ग्राम गडरिया बाग में किच्छा शुगर फैक्ट्री के बंद होने से गन्ना कई एकड़ में खड़ा है। अब समय आ गया है कि उत्तराखंड सरकार और जिला प्रशासन मानवता के आधार पर इन किसानों की समस्याओं का समाधान करे। अगर कोर्ट में यह पहले ही मानवता के आधार पर मामला ले जाया जाता, तो निश्चित तौर पर न्याय मिलता। पीड़ित किसानों की आत्महत्या की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी है। यह आरोप लगाते हुए प्रदेश प्रवक्ता उत्तराखंड कांग्रेस डॉ गणेश उपाध्याय ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कहीं।
