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विश्व भर में 5जून को अन्तर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस मनाया जाता है जलवायु परिवर्तन, कार्बन का अधिक उत्सर्जन, कंक्रीट का बढ़ता जंगल,वर्ष दर वर्ष धरती का बढ़ता तापमान, , जंगलों में आग लगने की बढ़ती घटनाएं जीव-जंतुओं की नष्ट व विलुप्त होती प्रजातियां जीव-जन्तुओं के रहने के आवास की कमी व भोजन न मिलने की समस्या, बढ़ता मानव- पशु संधर्ष,सूखा, अतिवृष्टि जैसी आपदाएं धरती माता को झकझोरती है रासायनिक खादों का बढ़ता उपयोग बंजर होती भूमि,प्लास्टिक का रोजमर्रा के कार्यों में अधिक उपयोग सिर्फ उसका नष्ट न हो पाना एक पेड़ लगाने से और सोशल मीडिया पर विल्क कर दिखाने से आप पर्यावरण प्रेमी नहीं हो जाते प्रकृति संरक्षण हमारी जीवन शैली में अपनाना जैसे पानी का उचित उपयोग, जल भंडारण,कार्बन उत्सर्जन ,कुड़ा निस्तारण , खेती करने व भोजन ग्रहण में हम कितना आर्गेनिक होते हैं कौन सा वाहन इस्तेमाल करते हैं हम पौधौ को लगाने के बाद उसे कितना संभालते हैं। पर्यावरण के प्रति हमारी अच्छी सोच व हमारी जीवन शैली में इसका निरन्तर अनुसरण व प्रयोग हमारे पर्यावरण प्रेमी होने का पैमाना है, पक्षियों को दाना पानी,चीटियों को आटा,गायों को रोटी व हरा चारा, कुत्ते को रोटी हमारी प्राचीन पीढ़ियों की विरासत में मिले गुण थे जिन्होंने इस परम्परा इसको जिया था वह पेड़ पौधों की पूजा-अर्चना करते थे लेकिन आज की जेन- जी पीढ़ी आधुनिकता के फेर में इस संस्कृति को भूलती जा रही हैव अधिक सुविधाओ के चक्कर में अपने पर्यावरण के ही विनाश करने पर तुली है परन्तु मनुष्य का शरीर भी पंचमहाभूतों से बना है धरती पर सभी जीव- जन्तुओं चिड़ियों तितलियों,सांपों ,मेढकों असंख्य जीवों का अपना एक संसार है जहां सुंदर स्वस्थ वाटिका होगी वहां तितलियां स्वयं ही आ जायेगी । यह एक पारिस्थितिकी तंत्र है जो प्रकृति व मनुष्य को आपस में सुंदरता से जोड़ता है हम इस कड़ी को मजबूत बनाये और वृक्षारोपण व उनकी उचित देखभाल, जलसंरक्षण,कचरा-प्रबंधन हरित ऊर्जा, प्रकृति संरक्षण आदि के द्वारा हम पर्यावरण को सुरक्षित रखने का संकल्प लें और आने वाली पीढ़ियों को सुंदर व स्वस्थ पर्यावरण सौपे
प्रस्तुति –नरेश छाबड़ा
आवास-विकास रूद्रपुर
8630769754

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