परिवादी नवीन कुमार ने नैरोलैक पेंट की 10 लीटर पेंट की बाल्टी गर्व इंफ्राटेक भूरारानी रोड रूद्रपुर उधम सिंह नगर से खरीदी थी जिस पर प्रिंटेड 2217 था परिवादी को 2400 में बेची गई बर्बादी से कहा गया इसका मूल्य बढ़ गया है परिवादी ने कहा मार्केट में यह सस्ती मिल रही है और बाकी पैसे वापस करो तो वापस करने से मना कर दिया और अभद्रता की जिस क्षुब्ध होकर परिवादी ने गर्व इंफ्राटेक की शिकायत नैरोलैक कंपनी को की कंपनी ने कोई जवाब नहीं दिया इससे क्षुब्ध होकर परिवादी ने 90 दिन में न्याय की आशा के साथ एक परिवाद दिनांक 4 /3/ 2022 को जिला उपभोक्ता आयोग में प्रस्तुत किया प्रार्थी इसी आशा उम्मीद के साथ हर महीने निर्धारित होने वाली तिथि पर जाता था और न्याय की उम्मीद करता था किंतु विपक्षी प्रार्थी का मजाक बनाते हुए आते और तिथि स्थगन का प्रार्थना पत्र देकर के चले जाते प्रार्थी ने समय पर साक्ष्य एवं लिखित तर्क माननीय आयोग को उपलब्ध करा दिए विपक्षी ने अपने लिखित बहस प्रस्तुत करने में ही 2 साल का वक्त जाया कर दिया जिस कारण निर्णय समय पर नहीं हो पाया साढे चार साल बाद दिनांक 22.10.2026 को आदेश प्रार्थी के को मिला जिसमें मात्र 183 रुपए जो अधिक वसूले गए थे वापस करने का आदेश और ₹2000 वाद व्यय के रूप में प्रार्थी को देने का आदेश दिया गया
इसी के साथ में नैरोलैक पेंट को दोष मुक्त कर दिया गया और दुकानदार को आंशिक रूप से दोषी माना गया!
दुकानदारों का इस प्रकार का मुनाफाखोरी का कृत्य ग्राहकों का शोषण एवं ग्राहक अधिकारों के हनन की श्रेणी में आता है
हम आशा और उम्मीद को लिए हुए अपनी बात को उच्च अधिकारियों अथवा सक्षम स्तर पर रखने का प्रयास करते हैं और जब नहीं सुनी जाती है तो बड़ा कष्ट होता है
माननीय आयोग ने आंशिक रूप से दोषी माना ! दोषी आंशिक हो या पूर्णत: हो दोषी दोषी होता है| और 4.5 साल तक न्याय की उम्मीद में भटकने के बाद 10 October 2026 को निर्णय हुआ |
आज ग्राहक अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा है और इस प्रकार ग्राहकों का शोषण हो रहा है यदि ग्राहकों का शोषण रोकना है तो इस प्रकार के कार्यों के लिए शोषण करने वाले दुकानदारों के विरुद्ध भारी जुर्माना का प्रावधान होना चाहिए तभी ग्राहक अधिनियम और उपभोक्ता आयोग की स्थापना पूर्णत: फलीभूत होगी|
जागरूकता ही बचाव है!
