रिपोर्टर अश्वनी दीक्षित खबर पड़ताल

उत्तराखंड के पहाड़ों में आत्मनिर्भरता की राह को मजबूत करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने के लिए पशुपालन एक महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभर रहा है। गांवों में खेती-किसानी के साथ दूध उत्पादन भी हजारों परिवारों की आजीविका का सहारा है। ऐसे में पशुपालकों को प्रोत्साहन, पशु खरीद पर सब्सिडी और दूध का उचित मूल्य दिलाने की दिशा में कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा जी के प्रयास पशुपालन को मजबूत बनाने की पहल के रूप में देखे जा रहे हैं उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन सिर्फ एक व्यवसाय नहीं, बल्कि कई परिवारों की रोजी-रोटी का अहम जरिया है। किसान खेती के साथ गाय-भैंस पालकर दूध बेचते हैं और इसी अतिरिक्त आमदनी से अपने बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और परिवार की जरूरतें पूरी करने में मदद पाते हैं।ऐसे में पशुपालकों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और उनके लिए पशुपालन को लाभकारी व्यवसाय बनाना बेहद जरूरी है कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा जी पशुपालन क्षेत्र को प्रोत्साहन देने और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयासरत हैं। पशुपालन से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को पशु खरीद पर सब्सिडी जैसी सहायता मिलने से इस व्यवसाय को आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है वहीं, दूध का उचित मूल्य पशुपालकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दूध की बिक्री से होने वाली नियमित आमदनी ही उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती देती है जरूरत इस बात की है कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर बैठे पशुपालक तक पहुंचे, उन्हें समय पर सहायता मिले