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काशीपुर -शिक्षा नीति की बात करें तो सरकार हर संभव प्रयास कर रही है कि प्राइवेट स्कूल सरकार की शिक्षा नीति के नियमों की धज्जिया उड़ाते हुए , नियमों को दर किनारे करते हुए अभिवावक का आर्थिक रूप से खून चूसने का गोरख धंधा बनाये हुए है! जहाँ एक तरफ सरकार इन स्कूल के गोरख धंदे पर लगाम लगाने के लिए शिक्षा अधिकारियों पर नकेल कस्ते है वही विश्वासगत सूत्रों की माने तो स्कूल संचालक इन अधिकारियों की जेब गर्म कर इनकी कानूनी कार्यवाही को ठंडा कर देते है और अभिवावक मजबूर होकर हाथ मलते रहते है परन्तु अधिकारियों की मिली भगत और अनदेखी के कारण प्राइवेट स्कूलों के द्वारा छात्रों पर कभी काफी किताब, तो कभी स्कूल यूनिफॉर्म के लिए एक दुकान से लेने के लिए बाध्य किया जाता है। तो कभी स्कूल में सुविधा शुल्क तो कभी फैसिलिटी फीस और कभी एनुअल चार्ज के नाम नाम पर अभिभावक को और छात्रों को मजबूर किया जाता है। और अब स्कूलों द्वारा एडमिट कार्ड का नया फॉर्मूला सामने आ रहा है जिसमें छात्रों के अभिभावकों के द्वारा अगर एडवांस फीस नहीं दी जाती है तो बच्चों को एग्जाम देने से रोके जाने की बात कही जाती है। और छात्र छात्रों की एडवांस जमा न होने पर उन्हें कक्षा से बाहर खड़ा या कक्षा के बच्चों के सामने उसको मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। नए सत्र की शुरुआत माह मार्च, अप्रेल मे होने जा रही है तो अभिवावक अपने बच्चो के भविष्य को लेकर ठगे जाने को महसूस करने लगे है और उम्मीद लगाए है इन स्कूल की बिना बंदूक के लुटे जाने से कौन हमें आर्थिक रूप से बचाएगा प्रशासन या शासन कौन बनेगा हुकमरान

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