किच्छा। धरा सेवा फाउंडेशन ट्रस्ट उत्तराखंड (रजि.) के सचिव प्रदीप सिंह खालसा ने एक कार्यक्रम में जानकारी देते हुए ब्लड सेवा से अपने अस्थायी विराम को लेकर भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्लड सेवा से लिया गया यह विराम सेवा की भावना से दूरी नहीं, बल्कि कुछ विशेष परिस्थितियों से जुड़ा हुआ है।
प्रदीप सिंह खालसा ने कहा कि उनके जीवन में एक ऐसा व्यक्ति है, जिसने उस समय उनका साथ दिया, जब वह व्यक्तिगत रूप से बेहद कठिन दौर से गुजर रहे थे। जब उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें और किस दिशा में आगे बढ़ें, उस समय उस व्यक्ति ने उन्हें समझाया, हौसला दिया और सही रास्ता दिखाया।
उन्होंने कहा कि वह व्यक्ति किसी परिचय का मोहताज नहीं है। उसकी पहचान किसी पद या परिचय से नहीं, बल्कि उसके कर्मों और लोगों के प्रति उसके समर्पण से है। उस कठिन समय में मिले सहयोग को वह आज भी बेहद सम्मान के साथ याद करते हैं।
प्रदीप सिंह खालसा ने स्पष्ट किया कि उस व्यक्ति का नाम पूरी तरह गोपनीय रखा गया है। वह उसकी पहचान सार्वजनिक नहीं करना चाहते। उनके लिए उस व्यक्ति का नाम या परिचय सामने लाने से अधिक महत्वपूर्ण उसके द्वारा कठिन समय में दिया गया साथ, मार्गदर्शन और सहयोग है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में किसी कारणवश वह व्यक्ति भी ब्लड सेवा में सक्रिय नहीं है। इसी कारण उन्होंने भी फिलहाल ब्लड सेवा से दूरी बना रखी है। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि यह दूरी स्थायी नहीं है और जरूरतमंदों की सेवा के प्रति उनकी भावना आज भी पहले जैसी ही है।
प्रदीप ने कहा कि जिस दिन वह व्यक्ति उनसे दोबारा कहेगा—“आओ प्रदीप, पहले की तरह सच्चे मन से और निस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं”, उस दिन वह बिना किसी सवाल के दोबारा सेवा के लिए खड़े होंगे।
उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि उस दिन वह पहले से भी अधिक ऊर्जा और समर्पण के साथ सेवा करेंगे। उनके शब्दों में, “मैं विश्वास दिलाता हूं कि पहले से चार गुना ज्यादा सेवा करूंगा।”
उन्होंने कहा कि उनके लिए ब्लड सेवा कभी किसी पद, पहचान या प्रसिद्धि का माध्यम नहीं रही। यह उनके लिए हमेशा इंसानियत से जुड़ा कार्य रहा है। किसी जरूरतमंद मरीज के लिए रक्तदाता तलाशना, रात के समय मदद के लिए आगे आना और किसी परिवार को मुश्किल समय में भरोसा देना उनके लिए सेवा का हिस्सा रहा है।
उन्होंने रक्तदाताओं, सहयोगियों और उन सभी लोगों का भी आभार व्यक्त किया जिन्होंने अब तक उनके साथ मिलकर जरूरतमंद मरीजों तक रक्त पहुंचाने में सहयोग किया।
प्रदीप सिंह खालसा का कहना है कि सेवा से विराम लिया जा सकता है, लेकिन इंसानियत से रिश्ता नहीं तोड़ा जा सकता। उन्होंने संकेत दिया कि परिस्थितियां अनुकूल होने पर वह दोबारा उसी समर्पण के साथ ब्लड सेवा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।
कुछ लोग जिंदगी में सिर्फ साथ नहीं देते, बल्कि मुश्किल समय में हमें दोबारा खड़ा होना सिखाते हैं। ऐसे लोगों को भुलाया नहीं जाता ।
