किच्छा। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने अपने आवास पर मीडिया को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा 8 अगस्त की कांग्रेस रैली के संबंध मे हल्द्वानी में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम को लेकर दिए गए बयान पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने बिना किसी ठोस प्रमाण के एक धार्मिक आयोजन को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जाति से जोड़कर पूरे प्रकरण को जातिगत रंग देने का प्रयास किया है। कहा कि राहुल गांधी आज तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण सार्वजनिक नहीं कर पाए हैं, जिससे यह साबित हो कि उक्त कार्यक्रम में हवन-शुद्धिकरण की प्रक्रिया मल्लिकार्जुन खड़गे की जाति के कारण की गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम न तो भारतीय जनता पार्टी का था और न ही उत्तराखंड सरकार का। कार्यक्रम का आयोजन एक स्वतंत्र धार्मिक संगठन द्वारा किया गया था।
उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस के पास इस आयोजन में भाजपा अथवा राज्य सरकार की किसी भी प्रकार की संलिप्तता का कोई प्रमाण है तो उसे सार्वजनिक करना चाहिए। केवल राजनीतिक मंच से आरोप लगाने मात्र से कोई बात सत्य साबित नहीं हो जाती। आयोजकों द्वारा भी स्पष्ट किया गया है कि कार्यक्रम को किसी व्यक्ति की जाति से नहीं, बल्कि रामलीला मैदान की धार्मिक एवं सांस्कृतिक गरिमा से जोड़कर देखा गया था।
कहा कि इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि वाल्मीकि समाज से जुड़े अमित कुमार स्वयं कार्यक्रम में शामिल होने की बात कह रहे हैं और उन्होंने राहुल गांधी के बयान के विरुद्ध शिकायत भी दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है और पुलिस मामले की जांच कर रही है। कहा कि एफआईआर दर्ज होना किसी व्यक्ति को दोषी सिद्ध करने का प्रमाण नहीं, बल्कि लगाए गए आरोपों की कानूनी जांच शुरू होने का आधार है। पुलिस वीडियो फुटेज, प्रेस कॉन्फ्रेंस की पूरी रिकॉर्डिंग, मूल कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग तथा संबंधित लोगों के बयान सहित उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर मामले की सत्यता की जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक तथ्य सामने आएंगे।
रुद्रपुर में कथित मौलाना के विवादित बयान पर कांग्रेस अपना रुख स्पष्ट करे: राजेश शुक्ला
मीडिया से बातचीत के दौरान राजेश शुक्ला ने रुद्रपुर में बारावफात जुलूस के दौरान कथित मौलाना द्वारा दिए गए विवादित एवं सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने वाले बयान को लेकर भी कांग्रेस पर सवाल उठाए। उन्होंने कांग्रेस से अपना रुख स्पष्ट करने की मांग करते हुए कहा कि कांग्रेस बताए कि क्या वह प्रदेश और क्षेत्र में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली गतिविधियों के साथ खड़ी है अथवा ऐसे बयानों का विरोध करती है। उन्होंने कहा कि यदि बयान गलत और आपत्तिजनक है तो कांग्रेस के नेताओं को सार्वजनिक रूप से इसकी निंदा करनी चाहिए।
शुक्ला ने कहा कि इस जिले में नेता प्रतिपक्ष, उपनेता सदन सहित कांग्रेस के पांच विधायक हैं, लेकिन अभी तक किसी कांग्रेसी विधायक की ओर से इस मामले पर स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में भी कांग्रेस के किसी वरिष्ठ नेता द्वारा इस कथित विवादित बयान पर स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि पुलिस एवं प्रशासन द्वारा मामले को गंभीरता से लेते हुए कथित मौलाना के खिलाफ सांप्रदायिक माहौल खराब करने की साजिश के आरोप में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की गई है तथा गिरफ्तारी भी की जा चुकी है। ऐसे में कांग्रेस नेताओं की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि राजनीतिक दलों को किसी भी संवेदनशील धार्मिक अथवा सामाजिक विषय पर राजनीति करने के बजाय तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी सामाजिक सौहार्द, कानून-व्यवस्था और सभी वर्गों के सम्मान के पक्ष में है तथा किसी भी व्यक्ति द्वारा समाज में वैमनस्य फैलाने वाले बयान का समर्थन नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन धार्मिक और सामाजिक विषयों को बिना प्रमाण जातिगत अथवा सांप्रदायिक रंग देना समाज के लिए उचित नहीं है। ऐसे मामलों में आरोप-प्रत्यारोप के बजाय निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।
