2020 के विरोध प्रदर्शन का मामला फिर गरमाया, सिद्धार्थ भुसरी की गिरफ्तारी पर बवाल
वारंट पर गिरफ्तारी, दूसरे आरोपी के मंच पर होने से मचा राजनीतिक विवाद
‘एक आरोपी गिरफ्तार, दूसरा मंच पर’— कांग्रेस ने पुलिस पर लगाए दोहरे मापदंड के आरोप
पांच साल पुराने मुकदमे में गिरफ्तारी पर कांग्रेस का कोतवाली घेराव, कार्रवाई पर उठाए सवाल
गदरपुर। वर्ष 2020 में तत्कालीन कैबिनेट मंत्री एवं वर्तमान विधायक अरविंद पांडे के काफिले का विरोध करने के मामले में शुक्रवार को कांग्रेस नगर अध्यक्ष सिद्धार्थ भुसरी को पुलिस ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के गदरपुर कार्यक्रम के दौरान गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उन्हें थाने लाकर पांच वर्ष से अधिक पुराने मुकदमे में न्यायालय से जारी वारंट का नोटिस दिया और बाद में न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जमानत मिल गई।
जमानत मिलने के बाद सिद्धार्थ भुसरी अपने समर्थकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ कोतवाली गदरपुर पहुंचे और पुलिस कार्रवाई के विरोध में कोतवाली का घेराव कर प्रदर्शन किया। उन्होंने पुलिस पर एक ही मुकदमे में दो अलग-अलग मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।
सिद्धार्थ भुसरी ने बताया कि 17 दिसंबर 2020 को तत्कालीन कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे के गदरपुर दौरे के दौरान उन्होंने और प्रीत ग्रोवर ने उनके काफिले का विरोध करते हुए प्रतीकात्मक रूप से चूड़ियां फेंकी थीं। उसी घटना के संबंध में मंत्री की सुरक्षा में तैनात सुरक्षा कर्मी खीमानंद पांडे की तहरीर पर गदरपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। तहरीर में आरोप लगाया गया था कि मंत्री के सरकारी वाहन को रोकने, सरकारी कार्य में बाधा डालने, वाहन पर हमला करने, जान से मारने की धमकी देने और अभद्र भाषा का प्रयोग करने जैसी धाराओं में प्रीत ग्रोवर और सिद्धार्थ भुसरी को नामजद किया गया था।भुसरी का आरोप है कि शुक्रवार को उन्हें उसी मुकदमे में गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जबकि इसी मुकदमे का दूसरा नामजद आरोपी प्रीत ग्रोवर मुख्यमंत्री धामी के कार्यक्रम में मंच साझा करता दिखाई दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि दोनों एक ही मुकदमे के आरोपी हैं तो पुलिस ने केवल एक आरोपी के विरुद्ध ही वारंट की कार्रवाई क्यों की।कांग्रेस नगर अध्यक्ष ने कहा कि पुलिस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि एक ही मुकदमे में दो आरोपियों के साथ अलग-अलग व्यवहार क्यों किया गया। उन्होंने इसे राजनीतिक द्वेष से प्रेरित कार्रवाई बताते हुए कहा कि वह इस मामले में कोतवाल और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से जवाब मांगा। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी पुलिस के खिलाफ नारेबाजी कर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। समाचार लिखे जाने तक कांग्रेसी अपनी मांग पर टिके रहे।


