भाकपा(माले) जिला सचिव ललित मटियाली ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि जैसा कि पहले से ही आशंका नजर आ रही थी कि भाजपा अपनी हार को रोकने के लिए मतगणना भी रुकवा सकती है और मतपेटियां भी बदलवाने की साजिश कर सकती है ,ठीक वैसा ही हुआ।
कल रात जो स्ट्रांग रूम के बाहर कांग्रेस प्रत्याशी को बाहर धकेलने और संदिग्ध गाड़ियों में सामान लाने व ले जाने का घटनाक्रम हुआ और उस पर जिला प्रशासन का जो रवैया था उससे ऐसा लग रहा था जैसे जिला प्रशासन भाजपा कार्यकर्ताओं के रूप में काम कर रहा है। भाजपा राज में जब पहले भी कई बार इस तरह के घटनाक्रम होने के बाद भाजपा प्रत्याशियों को चुनाव जिताया गया और प्रशासन पर सवाल उठे, तो इस चुनाव में प्रशासन को चाहिए था कि वो सभी प्रत्याशियों व दलों को भरोसे में लेकर ही काम करे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
इससे पहले भाजपा सरकार के दवाब में चुनाव आयोग मतगणना की तारीख रोकने के लिए कोर्ट पहुंच गया और मतगणना अगली तारीख निर्धारित होने तक रोक दी । साफ जाहिर है कि खुलेआम चुनाव आयोग व जिला प्रशासन संविधान व नियम कायदों की धज्जियां उड़ाते हुए भाजपा के पक्ष में काम कर रहे हैं। अगर भाजपा सरकार एक छोटे से नगरपालिका के चुनाव में पहले एक ही शहर में 2 नगरपालिका बनाने, फिर चुनाव में खुलेआम सांप्रदायिक व नफरती भाषा का बेझिझक इस्तेमाल करना, फिर काउंटिंग ही रुकवा देना और फिर स्ट्रांग रूम में संदिग्ध गतिविधियों को प्रशासन द्वारा अंजाम देने जैसी साजिशपूर्ण तरीक़ों का इस्तेमाल कर रही है तो फिर बड़े चुनावों में भाजपा कितनी बड़ी से बड़ी साजिशे करती होगी ये किच्छा और सिरोलीकला में चुनावी घटनाक्रम से पता चलता है। यह सरकार और प्रशासन का तानाशाहीपूर्ण रवैये को स्पष्ट कर देता है।
