– स्वदेशी दिवाली मेले में कवि सम्मेलन बना आकर्षण का केंद्र

– कवियों ने श्रीराम के आदर्शों से लेकर सामाजिक सरोकारों तक की रचनाओं से श्रोताओं को किया भावविभोर

– टैलेंट शो में स्कूली बच्चों और स्थानीय कलाकारों ने दिखाई प्रतिभा, शिव तांडव की प्रस्तुति रही प्रथम

 

रुद्रपुर। शहर के श्रीराम पार्क में नगर निगम की ओर से आयोजित स्वदेशी दिवाली मेले की सांस्कृतिक संध्या शनिवार को साहित्य, हास्य, वीर रस, राष्ट्रप्रेम और रामभक्ति के अनूठे संगम में बदल गई। मेले के मंच पर आयोजित कवि सम्मेलन में देश के जाने-माने कवियों ने अपनी ओजस्वी, भावपूर्ण और हास्य से भरपूर रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को कभी भावविभोर किया तो कभी ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र, भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय एकता, सामाजिक विसंगतियों और पारिवारिक रिश्तों पर आधारित कविताओं ने कार्यक्रम में विशेष समां बांधा। देर शाम शुरू हुआ कवि सम्मेलन देर तक श्रोताओं को साहित्य की रसधारा में सराबोर करता रहा।

 

कवि सम्मेलन का शुभारंभ दर्जा मंत्री उत्तम दत्ता, जिलाधिकारी नितिन भदौरिया, महापौर विकास शर्मा, वरिष्ठ भाजपा नेता धीरेन्द्र मिश्रा एवं भारत भूषण चुघ ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम का संचालन कवि अभिजीत शर्मा ने किया।

 

बाराबंकी से आए कवि शिव किशोर तिवारी ‘खंजन’ ने मां सरस्वती की वंदना से कवि सम्मेलन का विधिवत आगाज किया। उनकी पंक्तियां ‘मधुरिम मधुरिम वीणा झनके, झूमे तन मन के तार, मां हंस वाहिनी आ जाओ, रस बूंद-बूंद बरसा जाओ… ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद मंच पर कविताओं का सिलसिला शुरू हुआ तो हर रचना पर श्रोताओं ने तालियों के साथ कवियों का उत्साह बढ़ाया।

 

हास्य और ओज के कवि आशीष कवि गुरु ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश देते हुए अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की। उन्होंने मां और बहन के महत्व को रेखांकित करते हुए सुनाया, मैं बताऊं कि जन्नत कहां है, जिसके घर में बहन और मां है… मां का आशीष लेना न भूलो, मां के चरणों में पूरा जहां है। उनकी इन पंक्तियों ने पारिवारिक रिश्तों और मातृशक्ति के महत्व को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा।

 

भगवान श्रीराम की महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने सुनाया, कौन कहता है कि करने को सैर जाते हैं, खाने शबरी के बेर नंगे पैर जाते हैं… राम के नाम की महिमा अजब है ऐ प्यारे, राम के नाम से पत्थर भी तैर जाते हैं। रामभक्ति से ओतप्रोत इस रचना पर पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा।

 

इसके बाद उन्होंने दांपत्य जीवन पर व्यंग्य करते हुए अपनी हास्य रचना सुनाई, मैं सच बताऊं पहले सा जुनून नहीं है, यानी कि मेरे घर में अब सुकून नहीं है… शादी के बाद कतरा-कतरा चूस के सनम, कहती है कि बॉडी में मेरे खून नहीं है। उनकी इस चुटीली प्रस्तुति ने श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। उन्होंने कई अन्य हास्य रचनाओं के माध्यम से भी रोजमर्रा की जिंदगी और सामाजिक परिस्थितियों पर व्यंग्य किया।

 

वीर रस के कवि कमलकांत तिवारी ने अपनी ओजस्वी वाणी से राष्ट्रप्रेम और देशभक्ति का वातावरण बना दिया। उन्होंने देश और मातृभूमि के प्रति समर्पण का संदेश देते हुए सुनाया देश का खाके मातृभूमि की जो करता जय-जयकार नहीं है, गौ-गायत्री का जिस मन में सोच-विचार नहीं है, लाल किले पर ही टांग दो जिसे देश से प्यार नहीं है। उनकी इस रचना पर श्रोताओं ने जोरदार तालियां बजाईं।

 

इसके बाद उन्होंने रुद्रपुर के महापौर विकास शर्मा की कार्यशैली और जनसेवा के संदर्भ में काव्यात्मक पंक्तियां प्रस्तुत कीं। उन्होंने कहा भले दिल के अब कहां इंसान मिलते हैं, बहुत कम लोग ऐसे हैं जो दयावान मिलते हैं… सदा दुख-दर्द में लोगों के आंसू पोंछने वाले, भला अब गांव में कहां ऐसे प्रधान मिलते हैं। लेकिन रुद्रपुर का सौभाग्य है कि महापौर विकास शर्मा जैसे दयावान प्रधान इस शहर को मिले हैं। इस रचना पर कार्यक्रम स्थल तालियों से गूंज उठा।

 

प्रेम और विरह की भावनाओं को स्वर देते हुए उन्होंने सुनाया तुम्हारे रूठ जाने का चला ये सिलसिला क्या है, बताओ तो सही मुझको तुम्हें शिकवा-गिला क्या है… तेरी यादें, अकेलापन, तुझे पाने की बेचौनी, भला इसके सिवा मोहब्बत में हमको मिला क्या है। प्रेम में विश्वास और बदलते रिश्तों पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, नजाकत थी कभी हमको, नजाकत छोड़ दी हमने, किसी से दिल लगाने की भी चाहत छोड़ दी हमने… सुना है आजकल के प्यार में धोखे बहुत हैं, तो मोहब्बत एक इबादत थी, इबादत छोड़ दी हमने।

 

सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था पर चोट करती उनकी एक अन्य रचना ने भी श्रोताओं का ध्यान खींचा। उन्होंने कहा, श्नाज जिसे करना था अपने पैदा किए सपूतों पर, सिसक रही वो धरती माता बेटों की करतूतों पर।श् आगे उन्होंने संसद और जनप्रतिनिधियों के दायित्वों पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश चलाने वाले जब अपने कर्तव्यों से विमुख होकर केवल अधिकारों के पीछे भागते हैं तो धरती मां को पीड़ा होती है। उन्होंने अपनी रचना के माध्यम से जनता से भी आह्वान किया कि जब तक नागरिक अपने जनप्रतिनिधियों पर अंकुश नहीं लगाएंगे, तब तक धरती मां की पीड़ा समाप्त नहीं होगी।

 

कवि शिव किशोर तिवारी खंजन ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और भगवान श्रीराम के आदर्शों का संदेश दिया। उन्होंने राष्ट्रध्वज की गरिमा और आपसी भाईचारे को अपनी कविता में पिरोते हुए सुनाया, ना कभी कोई आपस में दंगा रहे, प्रेम की बहती हर दिल में गंगा रहे, हम रहें ना रहें, तुम रहो ना रहो, पर ये लहराता हरदम तिरंगा रहे। उनकी इन पंक्तियों ने राष्ट्रप्रेम और सामाजिक सौहार्द की भावना को मजबूती से सामने रखा।

 

धार्मिक आस्था के साथ कर्म की महत्ता बताते हुए उन्होंने कहा, सिर्फ गंगा नहाने से कोई निर्मल नहीं होता, दुखीजन श्राप दें वो कभी निष्फल नहीं होता। हमारे भाग्य यदि कर्म से होता ना निर्धारण, राम का वन गमन सीता के संग में छल नहीं होता। इस रचना के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट किया कि मनुष्य की वास्तविक पहचान उसके कर्मों और आचरण से होती है। प्रेम और भक्ति के संबंध को दर्शाते हुए उन्होंने सुनाया, मिले यदि प्रेम का प्याला, जहर भी जाम होता है, हृदय जो प्रेम में डूबा, वो प्रभु का धाम होता है। हैं जिनका कार्य उत्तम और उत्तम है घराना भी, वहीं दशरथ का बेटा बनके पैदा राम होता है।

 

भगवान श्रीराम की सर्वव्यापकता और अटूट आस्था को व्यक्त करते हुए उन्होंने आगे कहा, राम हम सबकी शक्ति हैं, ये पावन नाम अपना है, अयोध्या राम की है और अयोध्या धाम अपना है। हमारे राम सृष्टि के हर कण में बसा करते, रहेंगे राम के होकर, यही पैगाम होता है। उनकी इन पंक्तियों ने रामभक्ति में डूबे श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

 

कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे कवि अभिजीत शर्मा ने भी अपनी रचना से श्रोताओं को प्रभावित किया। उन्होंने देश में आपसी एकता और सांप्रदायिक सद्भाव की भावना को मजबूत करने का संदेश देते हुए सुनाया, इतना दर्द हो कि मुकद्दर जवाब दे, कतरा करे सवाल तो समंदर जवाब दे और मुल्क में हो हमारे इतनी एकता दोस्तों, गर मस्जिद से हो सवाल तो मंदिर जवाब दे। उनकी इस रचना ने सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता का प्रभावशाली संदेश दिया।

 

इस अवसर पर महापौर विकास शर्मा ने कहा कि स्वदेशी दिवाली मेला केवल खरीदारी और मनोरंजन का आयोजन नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, परंपराओं, स्वदेशी उत्पादों और स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने का एक सार्थक प्रयास है। मेले के माध्यम से लघु व्यापारियों को अपना सामान बेचने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराया गया है, वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए शहर के बच्चों, युवाओं और स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। कवि सम्मेलन जैसे आयोजन समाज को साहित्य, संस्कार और सकारात्मक विचारों से जोड़ते हैं। भगवान श्रीराम के आदर्श, राष्ट्रप्रेम, सामाजिक समरसता और पारिवारिक मूल्यों पर आधारित कविताएं जीवन में अच्छे विचारों को आत्मसात करने की प्रेरणा देती हैं। नगर निगम का प्रयास है कि स्वदेशी दिवाली मेला शहरवासियों के लिए यादगार बने और इसमें हर वर्ग की सहभागिता सुनिश्चित हो।

 

दर्जा मंत्री उत्तम दत्ता ने कहा कि भारतीय संस्कृति और साहित्य हमारी समृद्ध परंपरा के महत्वपूर्ण आधार हैं। कवि सम्मेलन समाज को जोड़ने और नई पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम, संस्कार तथा सकारात्मक सोच विकसित करने का प्रभावी माध्यम हैं। ऐसे आयोजनों से स्थानीय स्तर पर सांस्कृतिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलता है। जिलाधिकारी नितिन भदौरिया ने कहा कि दीपावली जैसे पर्व हमारी सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता और आपसी सद्भाव के प्रतीक हैं। स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ ही स्थानीय कलाकारों और प्रतिभाओं को मंच देना सराहनीय पहल है। इस प्रकार के आयोजन समाज में उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

 

टैलेंट शो में शिव तांडव की प्रस्तुति प्रथम, पहाड़ी नृत्य को मिला दूसरा स्थान

 

कवि सम्मेलन से पहले आयोजित टैलेंट शो में स्कूली बच्चों और स्थानीय कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से बच्चों ने नृत्य, संगीत और सांस्कृतिक कला का परिचय दिया। शिव तांडव की प्रभावशाली प्रस्तुति देने वाली टीम को प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जबकि एलकेडी डांस ग्रुप की पहाड़ी नृत्य प्रस्तुति को दूसरा स्थान मिला। निर्णायकों और दर्शकों ने प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों की सराहना की।

 

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री स्वनिधि स्वरोजगार योजना के लाभार्थियों को चेक भी वितरित किए गए। इस पहल के माध्यम से छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी कारोबारियों को स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने का संदेश दिया गया। इस प्रकार स्वदेशी दिवाली मेले की शनिवार की संध्या साहित्य, संस्कृति, प्रतिभा सम्मान और स्वरोजगार के प्रोत्साहन के नाम रही।

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