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वसुधैब कुटुम्बकम् काशीपुर के तत्वधान में 51वां नेत्रदान संपन्न।

ब्रह्मलीन एडवोकेट श्री भगवती प्रसाद कोटनाला जी के गोलोक गमन के पश्चात उनकी पत्नी श्रीमती निर्मला कोटनाला जी व उनके सुपुत्रों श्री संदीप कोटनाला जी एवम श्री कर्नल अमित कोटनाला जी ने नेत्रदान की सहमति प्रदान कर समाज में अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। अब बाबू जी की आँखों से दो लोग दुनिया देखेंगे, जिससे उनके प्रियजन उनकी स्मृति को अमरत्व प्रदान करेंगे ।
वीर भूमि एनक्लेव निवासी बाबू जी स्वयं सामाज सेवा व धार्मिक कार्यों में संलग्न रहे। यह सराहनीय कार्य भी उनके जीवन प्रवृत्ति के अनुरूप है।
श्री भगवती प्रसाद कोटनाला जी के ब्रह्मलीन होने के समाचार पर दिनांक 25 मई रात्रि को वसुधैव कुटुम्बकम काशीपुर के दायित्वधारियों की देखरेख में मुरादाबाद से आई टीम ने कागजी औपचारिकता पूरी कर दान की गई आंखे (कॉर्निया) प्राप्त की।
इस नेत्रदान में जितेन्द्र दत्त देवलाल जी, श्री राजकुमार सेठी जी, सुनील चौहान जी व डॉ गिरीश तिवारी जी का विशेष सहयोग रहा।

संस्था के संस्थापक सदस्य अजय अग्रवाल जी ने बताया कि नेत्रदान से किसी प्रकार का अंग भंग नही होता। उन्होंने बताया कि नेत्रदान के लिए कोई उम्र की सीमा नहीं होती है। 1 साल के बच्चे से लेकर 90 वर्ष के बुजुर्ग तक का नेत्रदान हो सकता है। मधुमेह (डायबिटीज), उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर), दमा (अस्थमा) या मोतियाबिंद (Cataract) का इलाज करवा चुके लोगों का भी नेत्रदान हो सकता है। नेत्रदान प्रकल्प संयोजक सचिन अग्रवाल ने बताया कि मृत्यपरांत परिवारजन दोनों आखों पर रुई के गीले फाये रखकर सिर थोड़ा ऊंचा कर दें एवम पंखा बंद कर दें या चेहरे पर चादर ढककर आंखों को सीधी हवा से बचायें। आवश्यकतानुसार एसी चला सकते हैं। संस्था के अध्यक्ष विकास जैन जी ने बताया कि नेत्रदान करवाने को नेत्रदान सहायता (24×7)
98370 80678 या 88990 45015 पर किसी भी समय संपर्क किया जा सकता है ।

संस्था के संरक्षक योगेश जिंदल जी, अध्यक्ष विकास जैन जी, सचिव प्रियांशु बंसल जी, कोषाध्यक्ष सौरभ अग्रवाल जी, संस्थापक सदस्य अजय अग्रवाल जी, आशीष गुप्ता जी, अनुज सिंघल जी, अंकुर मित्तल जी, आशीष पैगिया जी, सीए सचिन अग्रवाल जी, वसुधैव कुटुंबकम् काशीपुर के तत्वाधान में सम्पन्न हुए इस महान कार्य के प्रति नेत्रदानी कोटनाला परिवार का आभार व्यक्त किया और परम पिता परमेश्वर से दिवंगत आत्मा की चिरशांति की प्रार्थना की । साथ ही क्षेत्र वासियों से मरणोपरांत नेत्रदान कराने में वसुधैव कुटुंबकम् काशीपुर को सहयोग का आग्रह किया ।

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