धान-गेहूं खरीद के लिए ₹1,100 करोड़ का बजट, जबकि धान खरीद पर ही ₹1,700 करोड़ से अधिक का अनुमान! उत्तराखंड में खरीफ विपणन सत्र 2026-27 के लिए धान खरीद के लक्ष्य और सरकार के बजटीय प्रावधान को लेकर वित्तीय गणना पर सवाल उठ रहे हैं। धान खरीद के लिए निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले किसानों को भुगतान की संभावित राशि और धान-गेहूं खरीद के लिए रखे गए बजट के बीच अंतर को लेकर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

उत्तराखंड कांग्रेस के महामंत्री एवं कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष *डॉ. गणेश उपाध्याय* ने कहा कि वर्तमान में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में धान खरीद का लक्ष्य 7 लाख मीट्रिक टन यानी 70 लाख क्विंटल बताया गया है। सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹2,441 प्रति क्विंटल तथा ग्रेड-A धान का ₹2,461 प्रति क्विंटल है।

इन दरों के आधार पर यदि पूरे 70 लाख क्विंटल धान की खरीद होती है, तो किसानों को भुगतान की सकल राशि लगभग ₹1,709 करोड़ से ₹1,723 करोड़ तक पहुंच सकती है। दूसरी ओर, राज्य सरकार के अनुपूरक बजट में धान और गेहूं की खरीद के लिए अन्नपूर्ति योजना के अंतर्गत ₹1,100 करोड़ का संयुक्त प्रावधान बताया गया है। आप खुद समझ सकते हैं, सरकार किसानों के प्रति कितनी असंवेदनशील है । जबकि मेरे द्वारा पूर्व में भी नैनीताल हाई कोर्ट में किसानों के लिए जनहित याचिका में सरकार ने एफिडेविट लिखकर दिया था कि हम 24 घंटे से लेकर 72 घंटे के अंदर किसानों का भुगतान करेंगे।

डॉ. उपाध्याय ने कहा कि इन आंकड़ों को देखते हुए सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि धान और गेहूं खरीद के लिए निर्धारित बजट, केंद्र से मिलने वाली सहायता तथा किसानों के भुगतान की व्यवस्था किस प्रकार की गई है। ₹1,100 करोड़ का संयुक्त प्रावधान और केवल धान खरीद पर संभावित सकल भुगतान के बीच लगभग ₹609 करोड़ से ₹623 करोड़ का गणितीय अंतर दिखाई देता है। हालांकि, यह अंतर अपने आप में सरकारी धन की कमी का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य और समय पर भुगतान मिलना चाहिए। सरकार को धान और गेहूं खरीद के लिए अलग-अलग बजट, केंद्र से प्राप्त होने वाली राशि, वास्तविक खरीद लक्ष्य तथा किसानों को भुगतान की समयसीमा सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि किसानों के बीच किसी प्रकार का भ्रम न रहे।

डॉ. गणेश उपाध्याय* ने कहा कि कृषि प्रदेश की अर्थव्यवस्था और किसानों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए धान खरीद की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसानों को अपने भुगतान के लिए अनिश्चितता का सामना नहीं करना पड़ना चाहिए।