नरेश छाबड़ा आवास विकास रूद्रपुर 

॓आ गये मेरी मौत का तमाशा देखने,, फिल्म,,तिरंगा,,,,ये मुसलमान का खून है ये हिन्दू का बता कौन सा ख़ून मुसलमान का कौन सा हिन्दू का ,, फिल्म ,,,,क्रांतिवीर जैसे अदभुत शैली में अपने चेहरे पर गुस्से के भाव लाकर व दोनों उठाकर डायलॉग बोलने वाले व हर किरदार को सिल्वर स्क्रीन पर विविधता से भर देने वाले हिंदी व मराठी फिल्मों के अभिनेता नाना पाटेकर 75 नहीं रहे।उनका अचानक चले जाना दु़़॒खद है कलाकार तो चले जाते हैं परंतु उनकी कालजयी फिल्म रचनाएं लोगों में दीपशिखा का माध्यम बन नयी पीढ़ी के कलाकारों में सीखने की एक पाठशाला बनती है वे एक अभिनेता के साथ साथ एक अच्छे इंसान भी थे वे पीड़ित किसानों की मदद करते व उनकी आवाज बने नाना की सबसे प्रसिद्ध उनकी,, आवाज थी लेकिन वह अक्सर भूल जाते थे कि अभिनेता की असली ताकत आवाज में नहीं बल्कि आवाज के पहले और बाद की खामोशी में होती है उनके संवाद भीतर से निकलते थे किसी परेशान किसान व किसी दुःखी छोटी बच्ची को देखकर हैरानी से देखना व फिर अचानक निश्चल हंसी हंसना व उसे भी हंसाना उनके अभिनय को और भी विशिष्ट बनाता था उनका अभिनय आम इंसान से जुड़ा था वह एक खुदरंग अभिनेता के रूप में दर्ज रहेंगे 1जनवरी 1951 में जन्मे नाना भारतीय सिनेमा के दिग्गज और प्रभावशाली अभिनेता,लेखक व निर्माता थे आर्थिक तंगी के बावजूद शुरुआती दिनों में उन्होंने मुंबई के जे,जे,, स्कूल आफ आर्ट से अभिनय कला की शिक्षा ग्रहण कर 1978मे पहली मराठी फिल्म,, गमन से डेब्यू किया उन्होंने तीन बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त किया व वर्ष 1913,,,मे फिल्म कला में योगदान के लिए भारत सरकार ने ,,,पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया महाराष्ट्र सरकार द्वारा भी क ई पुरस्कार प्रदान किया उन्होंने पीड़ित किसानों की मदद के लिए नाम फाउंडेशन की स्थापना की किसी कलाकार का असमय जाना अखरता है वे अपनी परींदा , खामोशी, प्रहार अंकुश, क्रांतिवीर,तिरंगा जैसी , फिल्मो व कला के माध्यम से वह सदा लोगों के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगे ,,,, महान् अभिनेता को,, विनम्र श्रद्धांजलि