Spread the love


देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चल रहे विवाद और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. वी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने स्थिति स्पष्ट करते हुए भरोसा दिलाया है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम बिना जांच के मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पात्र मतदाताओं को किसी तरह से डरने या घबराने की जरूरत नहीं है।
पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज होने के बाद राजनीतिक स्तर पर भी आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। आरोप है कि कुछ राजनीतिक लोगों और शरारती तत्वों द्वारा गरीब और अनपढ़ मतदाताओं को दो स्थानों पर मतदाता होने का भय दिखाकर जेल भेजने की धमकी दी जा रही है। इससे कई मतदाताओं में भ्रम और भय की स्थिति पैदा हुई है।
वहीं, कुछ मामलों में मृतकों और अज्ञात व्यक्तियों के नाम पर फर्जी मोबाइल नंबरों के माध्यम से हजारों आपत्तियां दर्ज किए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। इसे लेकर निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
मामले को लेकर कांग्रेस प्रदेश महामंत्री डॉ. गणेश उपाध्याय ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. वी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम से फोन पर विस्तृत वार्ता की। उन्होंने कहा कि सीईओ उत्तराखंड की वेबसाइट पर उपलब्ध फॉर्म-10 के अनुसार विधानसभा की मतदाता सूची के संबंधित भागों में कुछ मतदाताओं के नामों के विरुद्ध गलत एवं अवैध आपत्तियां दर्ज की गई हैं।
उन्होंने मांग की कि फॉर्म-7 के माध्यम से जिन मतदाताओं के नाम के विरुद्ध आपत्ति दर्ज की गई है, उनसे वास्तविक रूप से आपत्ति किए जाने की पुष्टि कराई जाए। यदि आपत्ति की पुष्टि नहीं होती है तो निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के नियम 17 के तहत ऐसी आपत्तियों को निरस्त किया जाए। यदि आपत्तिकर्ता द्वारा आपत्ति किए जाने की पुष्टि होती है तो नियम 19 के तहत आपत्तिकर्ता और संबंधित मतदाता को सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाए। इसके बाद नियम 20 के तहत आपत्तिकर्ता को व्यक्तिगत रूप से साक्ष्य सहित उपस्थित कराकर मामले की जांच की जाए और नियमानुसार निस्तारण किया जाए।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने वार्ता के दौरान भरोसा दिलाया कि पुनरीक्षण प्रक्रिया में सामने आ रही तकनीकी दिक्कतों को दूर करने के लिए सॉफ्टवेयर को अपडेट किया जा रहा है। जल्द ही सभी तकनीकी समस्याओं का समाधान कर दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग बिना पूरी जांच और आवश्यक परीक्षण के किसी भी नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी मतदाता के नाम पर आपत्ति दर्ज की गई है तो संबंधित मतदाता को अपना पक्ष रखने और सुनवाई में भाग लेने का पूरा अवसर दिया जाएगा। जांच में जो लोग वास्तव में नियमों के विपरीत दो स्थानों पर मतदाता के रूप में दर्ज पाए जाएंगे अथवा अन्य कारणों से अपात्र होंगे, केवल उन्हीं के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
निर्वाचन आयोग के इस स्पष्टीकरण से उन मतदाताओं को राहत मिलने की उम्मीद है, जो अफवाहों और आपत्तियों को लेकर आशंकित थे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया नियमों के अनुसार पूरी की जाएगी और किसी भी पात्र नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

You cannot copy content of this page