इस दौरान जिलाध्यक्ष ललित मटियाली ने कहा कि इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट से अब यह सार्वजनिक हो चुका है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने एस आई आर की प्रक्रिया में नियम विरुद्ध बदलाव किया और इन बदलावों पर अन्य 2 चुनाव आयुक्तों की असहमतियों को दरकिनार कर दिया गया। 2 चुनाव आयुक्तों ने 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की। लेकिन उनकी आपत्तियां दरकिनार कर दी गईं।
ज्ञानेश कुमार ने सत्ताधारी राजनीतिक पार्टी भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए मनमाने तरीके से एसआईआर के नियमों व वोटर लिस्ट तैयार करने में बदलाव किया गया।
भाकपा माले नेता एडवोकेट अमनदीप कौर ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त भाजपा – संघ के कार्यकर्ता की तरह कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले जनता सरकार चुनती थी। लेकिन अब भाजपा सरकार जनता चुन रही है। वह ज्ञानेश कुमार के माध्यम से एसआईआर करके असहमति वाले वोट, अल्पसंख्यक, दलित वोटों को हटाना चाहती है।
उन्होंने कहा कि वोट हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। ज्ञानेश कुमार ने इस संवैधानिक अधिकार को छीनकर देश विरोधी कृत्य किया है। संसद को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव लाना चाहिए।
आइसा के प्रदेश सचिव धीरज कुमार ने कहा कि इस देश में सिर्फ एक अधिकार बराबरी का है वह है वोट का अधिकार। जो प्रधानमंत्री, पूंजीपति, गरीब सबका एक ही है। लेकिन सरकार इस बराबरी के अधिकार को भी छीनकर हिटलर तानाशाही लाना चाहती है। उन्होंने कहा जैसे जेनजी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को मजबूर किया था। उसी तरह से ज्ञानेश कुमार को भी इस्तीफा देना होगा। वरना यह आंदोलन देशव्यापी बनेगा।
पुतला फूंकने वालों में अनिता अन्ना, सत्येंद्र, ज्ञानी सुरेन सिंह, रवीना, प्रीति, दीपक , विजय शर्मा, रंजन विश्वास , हरिओम आदि लोग उपस्थित थे।
