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तमाम गानों को अपनी मखमली आवाज से सजाने वाली दिग्गज गायिका का मुंबई के बीच कैंडी अस्पताल में दुखदः अंत हो गया उन्होंने अपनी मधुर व बहुमुखी वर्सेटाइल आवाज का जादू बिखेरा हर शैली मे चाहे वह पाप ,राक हो या भक्ति संगीत,ग़ज़ल, ठुमरी,शास्त्रीय गायन ,मैलोडी, बच्चों के गाने, रोमांटिक गाने जिसमें,,, तोरा मन दर्पण कहलाए, चंदा मामा दूर के,इन आंखों की मस्ती के,पिया तू अब तो आ जा ,दम मारो दम ,दिल चीज क्या है,अभी न जाओ छोड़ कर,जरा सा झूम लूं मैं , उड़े जब जब जुल्फें तेरी,जिंदगी के सफर में गुजर जाते हैं जो मकां वो फिर नहीं आते जैसे संवेदनशील बेहतरीन तरीके से गाने गाये जो आज आज भी लोगों की जुबान पर है फिल्म उमराव जान के गानों के लिए उन्होंने राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने लगभग 20 भाषाओ में 12000से ज्यादा गानो को अपनी सुरीली आवाज से सजाने वाली भारतीय संगीत की इस दिग्गज गायिका ने 7 दशको तक अपनी गायकी से देश- विदेशो में मखमली आवाज का जादू बिखेरा। उन्होंने सर्वप्रथम 1943मे एक मराठी फिल्म के लिए गाना गाया।1997मे ग्रेमी पुरस्कार प्राप्त करने वाली पहली भारतीय गायिका बनीं। फिर 2008मे राष्ट्रपति द्वारा पद्मविभूषण पुरस्कार भारतीय संगीत में अतुलनीय योगदान के लिए व वर्ष 2000 में फिल्म संगीत गायन के लिए दादासाहेब फाल्के पुरस्कार प्रदान किया गया वर्ष 2011मे उनका नाम गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ । उनका कहना था की आवाज पानी की तरह होनी चाहिए मेहनत व अभ्यास ही संगीत का गुरू है संगीत ही उनके लिए सांस थी जीवन में अनेक विषय परिस्थितियों में भी उन्होंने संगीत का हाथ मजबूती से पकड़े रखा और की ओर आगे बढ़ती गयी सिल्वर स्क्रीन पर अपनी आवाज के जादू से एक खूबसूरत मुकाम हासिल किया इस दिग्गज गायिका का जाना बेहद दुखदः है परन्तु उनके गाये अमर गीत आने वाली पीढ़ियों के लिए एक दीपशिखा व प्रेरणा स्रोत रहेंगे,,, विनम्र श्रद्धांजल।

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