पंतनगर, 5 नवंबर। कुलपति डा. शिवेन्द्र कुमार कश्यप की अध्यक्षता में प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधियों के साथ एक प्रेस वार्ता का आयोजन कुलपति सभागार में किया गया। प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधियों को जानकारी देते हुए कुलपति ने कहा कि क्वाक्वेरेली साइमंड्स (क्यूएस) द्वारा जारी एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर ने स्थान प्राप्त कर अपनी शैक्षणिक एवं शोध उत्कृष्टता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार तथा संस्थागत विकास के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों का परिणाम है। इस उपलब्धि को आगे बढ़ाते हुए विश्वविद्यालय अब राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में अपनी स्थिति और मजबूत करने के लिए रणनीतिक कार्ययोजना तैयार कर रहा है। उन्होंने इस उपलब्धि को शिक्षकों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि पंतनगर देश का पहला कृषि विश्वविद्यालय है और इसकी जिम्मेदारी केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि शिक्षा को नई दिशा देना, शोध एवं आधुनिक तकनीकों के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाना तथा वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देना भी है।

कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल रैंकिंग में स्थान प्राप्त करना नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शोध को प्रयोगशालाओं से खेतों और बाजार तक पहुंचाना तथा शोध एवं नवाचार के माध्यम से एक मजबूत रेवेन्यू मॉडल विकसित करना है। पंतनगर विश्वविद्यालय देश की एक महत्वपूर्ण धरोहर और विशिष्ट संभावनाओं का केंद्र है, जिसे शोध एवं विकास के लिए विशेष संरक्षण और प्रोत्साहन की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय भविष्य में क्यूएस की वैश्विक रैंकिंग में भी अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा। उन्होंने बताया कि इस वर्ष क्यूएस एशिया रैंकिंग में 26 उच्च शिक्षा प्रणालियों के 1,722 विश्वविद्यालयों को शामिल किया गया है। एशिया में हांगकांग विश्वविद्यालय शीर्ष स्थान पर रहा, जबकि पेकिंग विश्वविद्यालय दूसरे और सिंगापुर का राष्ट्रीय विश्वविद्यालय तीसरे स्थान पर रहा। भारत के 325 विश्वविद्यालयों ने इस रैंकिंग में प्रतिनिधित्व किया, जबकि चीन के 448 विश्वविद्यालय शामिल हुए। भारत के 34 नए विश्वविद्यालयों ने भी पहली बार रैंकिंग में जगह बनाई तथा 21 भारतीय संस्थान शीर्ष 200 में शामिल रहे।

कुलपति ने विश्वविद्यालय की हालिया उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले कुछ महीनों में शैक्षणिक एवं शोध क्षमता को मजबूत बनाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इनमें अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) के अंतर्गत अधिकाधिक शोध प्रस्ताव तैयार करना एवं प्रस्तुत करना, गुणवत्तापूर्ण शोध प्रकाशनों में वृद्धि, 40 से अधिक नए पेटेंट की दिशा में प्रयास, स्मार्ट कृषि तकनीकों को बढ़ावा देना, ड्रोन तकनीक प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्किंग, स्टार्टअप एवं नवाचार आधारित इकोसिस्टम का विकास, छात्र प्लेसमेंट में सुधार तथा आईसीएआर प्रत्यायन की तैयारियां प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त 20 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ संपर्क एवं सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास किए गए हैं। क्यूएस रैंकिंग के विभिन्न मानकों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इसमें अकादमिक प्रतिष्ठा का 30 प्रतिशत तथा नियोक्ता प्रतिष्ठा का 20 प्रतिशत भार होता है। इसके अतिरिक्त फैकल्टी-छात्र अनुपात, शोध पत्रों पर उद्धरण (साइटेशन), प्रति फैकल्टी शोध प्रकाशन, अंतरराष्ट्रीय शोध नेटवर्क, अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी एवं विद्यार्थियों की संख्या, पीएचडी धारक फैकल्टी तथा संस्थागत स्थिरता जैसे मानक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी मानकों पर निरंतर सुधार के लिए योजनाबद्ध एवं सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

कुलपति ने बताया कि एएनआरएफ के अंतर्गत विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ताओं द्वारा बड़ी संख्या में शोध परियोजनाओं के प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए हैं। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि पंतनगर विश्वविद्यालय ने एएनआरएफ के अंतर्गत सर्वाधिक शोध प्रस्ताव भेजे हैं। उन्होंने शोधकर्ताओं को राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धी शोध योजनाओं में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करने तथा गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान एवं शोध अनुदान प्राप्त करने के प्रयासों को और गति देने पर जोर दिया। विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध गुणवत्ता में सुधार के लिए आयोजित बैठक में छात्र-शिक्षक अनुपात, गुणवत्तापूर्ण शोध पत्रों का प्रकाशन, शोध पत्रों के उद्धरण, शैक्षणिक प्रदर्शन, विद्यार्थियों की उपलब्धियां तथा कक्षाओं एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों की गुणवत्ता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी चर्चा की गई। इसके साथ ही पेटेंट, शोध परियोजनाओं, अनुसंधान अनुदान, नवाचार तथा अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने को विश्वविद्यालय की भावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया।

कुलपति ने कहा कि पंतनगर के वैज्ञानिकों एवं विद्यार्थियों में अपार प्रतिभा और क्षमता है। आवश्यकता है कि इस क्षमता को गुणवत्तापूर्ण शोध, नवाचार, अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण के माध्यम से वैश्विक स्तर पर स्थापित किया जाए। विश्वविद्यालय की उपलब्धियां केवल संस्थान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उत्तराखंड राज्य की शैक्षणिक एवं कृषि विकास संबंधी जिम्मेदारियों को भी आगे बढ़ाती हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षकों, वैज्ञानिकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के सामूहिक प्रयासों, गुणवत्तापूर्ण शोध, नवाचार, बेहतर संस्थागत प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से पंतनगर विश्वविद्यालय राष्ट्रीय एवं वैश्विक शैक्षणिक मानचित्र पर और अधिक प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त करेगा। कार्यक्रम का संचालन सहायक निदेशक संचार डा. अर्पिता शर्मा काण्डपाल ने किया। इस अवसर पर डा. एस.के. गुरू, नोडल अधिकारी, योजना एवं तकनीकी प्रकोष्ट, डा. ममतेश कुमार, डा. पंकज कुमार, डा. रवि मोहन श्रीवास्तव, डा. मनीषा रानी, डा. जे.पी. पुरवार एवं प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधि उपस्थित थे।