मसूरी, उत्तराखंड, भारत में वैलेंटाइन डे की शुरुआत से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी है। कहा जाता है कि भारत में वैलेंटाइन डे मनाने की परंपरा की शुरुआत मसूरी से हुई थी। मसूरी में निवास कर रहे 75 वर्शिय मषहूर इतिहासकार गोपाल भारद्वाज ने बताया कि मसूरी में 14 फरवरी 1843 को इंग्लैंड में जन्मे मोगर मांक ने अपनी बहन मार्ग्रेट मांक को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने अपनी भावनाओं का इज़हार किया। इस पत्र में मोगर मांक ने लिखा था कि उन्हें एलिजाबेथ लुईन नाम की युवती से प्यार हो गया है और वे उसके साथ खुश हैं। यह पत्र मसूरी मर्चेंट द इंडियन लैटर्स पुस्तक में शामिल किया गया है, जो इस बात का प्रमाण है कि भारत में वैलेंटाइन डे की शुरुआत मसूरी से हुई।
इस पत्र के बाद मसूरी में प्रेम, स्नेह और समर्पण के प्रतीक के रूप में वैलेंटाइन डे मनाने की परंपरा शुरू हुई। धीरे-धीरे यह परंपरा भारत के अन्य हिस्सों में फैल गई। मसूरी, जो अपने खूबसूरत दृश्यों और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है, आज भी इस दिन को खास तरीके से मनाने के लिए एक लोकप्रिय स्थान है। यहां के लोग विशेष रूप से 14 फरवरी को प्रेमिका या प्रेमी के साथ समय बिताने के लिए मसूरी की हसीन वादियों में आते हैं। आज भी, 14 फरवरी को मसूरी में वैलेंटाइन डे पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जैसे कि प्यार के प्रतीक के रूप में गुलाब के फूलों का वितरण, संगीत कार्यक्रम और कला प्रदर्शन। यह दिन खासकर प्रेमियों के लिए खास होता है, और यहाँ के कई कैफे और होटलों में प्रेमियों के लिए डिनर और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यह इतिहास न केवल मसूरी बल्कि पूरे भारत में प्रेम के प्रतीक के रूप में माना जाता है, और यह इस दिन के मनाए जाने की शुरुआत का प्रतीक है।
गोपाल भारद्वाज ने बताया कि वैलेंटाइन डे, 14 फरवरी को, दुनिया भर में प्यार और स्नेह के जश्न के रूप में मनाया जाता है। यह दिन सिर्फ रोमांटिक प्यार का प्रतीक नहीं है, बल्कि सभी प्रकार के प्यार का सम्मान करने का एक अवसर है। इस दिन को मनाने का मतलब सिर्फ रोमांटिक रिश्तों को ही सेलिब्रेट करना नहीं है, बल्कि यह दोस्ती, परिवार, आत्म-सम्मान, और आत्मीयता जैसे प्यार के अन्य रूपों को भी मान्यता देने का दिन है। यह दिन खासकर प्रेमी-प्रेमिकाओं के लिए होता है, जहां वे एक दूसरे के प्रति अपनी भावनाओं का इज़हार करते हैं और एक दूसरे के साथ वक्त बिताते हैं। दोस्त एक-दूसरे के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने के लिए इस दिन को मनाते हैं, एक-दूसरे को विश करते हैं और अपने रिश्ते की अहमियत को जताते हैं। यह दिन परिवार के साथ भी मनाया जा सकता है, क्योंकि परिवार में प्यार और समर्थन एक स्थिर आधार है। इस दिन पर माता-पिता, भाई-बहन, और अन्य परिवार के सदस्य एक दूसरे को प्यार और शुभकामनाएं देते हैं। यह दिन खुद से प्यार और सम्मान करने का भी है। अपने आप से प्यार करना और आत्म-सम्मान की भावना को बढ़ावा देना भी वैलेंटाइन डे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस प्रकार, वैलेंटाइन डे सिर्फ एक दिन नहीं है, बल्कि यह सभी प्रकार के प्यार को सराहने और उत्सव के रूप में मनाने का अवसर है।
उन्होने कहा कि वर्तमान समय में, वैलेंटाइन डे को लेकर कुछ विवाद और मतभेद भी उभर कर सामने आए हैं। कुछ लोग इसे एक सुंदर अवसर मानते हैं, जो प्रेम, स्नेह और रिश्तों की अहमियत को बढ़ावा देता है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसे अश्लीलता और भौतिकता से जोड़कर देखते हैं। वैलेंटाइन डे को लेकर यह तर्क है कि इसे व्यापारियों ने एक बड़े कारोबारी अवसर के रूप में बदल दिया है, जहां महंगे तोहफों, फूलों, और उपहारों को खरीदने का दबाव महसूस होता है। इससे प्रेम और रिश्तों के वास्तविक अर्थ में कमी आ सकती है और यह भौतिक उपहारों तक सीमित हो सकता है। कुछ लोगों का मानना है कि यह दिन विशेष रूप से युवाओं के बीच अश्लीलता को बढ़ावा देता है। इसमें कुछ विपणन रणनीतियाँ, जैसे कि दिल के आकार के उपहार या रोमांटिक इवेंट्स, जिन्हें वे अनुचित मानते हैं, आलोचना का कारण बनती हैं। उनका कहना है कि इसे पारंपरिक भारतीय मूल्यों और संस्कृति के खिलाफ देखा जाता है। इस दिन को लेकर समाज में कुछ दबाव होता है कि यदि कोई प्रेम संबंध में नहीं है या किसी खास व्यक्ति के साथ नहीं है, तो वह खुद को अकेला महसूस कर सकता है। इस कारण से मानसिक तनाव या आत्मसम्मान की कमी का अनुभव हो सकता है। वैलेंटाइन डे को कुछ लोग इसे अपने मूल्यों के हिसाब से एक अवसर मानते हैं, जो प्रेम और एकता की भावना को फैलाता है।







