
सरकारी महकमों में भ्रष्टाचार खुल्लम खुल्ला चलता,हर काम के देने होते पैसे..!!


काशीपुर -इस दुनिया में कोई भी बंदा ऐसा नहीं है, जिसने अपनी जीवन में कोई अपराध न किया हो।आज ईमानदार वो है जिसकी बेईमानी पकड़ी नहीं गई और बेगुनाह वो है, जिसका जुर्म पकड़ा न गया हो।यह एक फ़िल्म का डायलॉग हैं जो आज भी भ्रष्टाचार पर फिट बैठता हैं वाकई में जबतक पकड़ा ना गया हो वह इंसान या महकमें का कर्मचारी ईमानदार हो कहा जायेगा और पकड़ा गया वह भ्रष्ट।हमारे देश में अब यह सर्वस्वीकृत तथ्य है कि बिना रिश्वत के कोई काम नहीं हो सकता। विकास परियोजनाओं में ठेकेदार हो, सरकारी नौकरी पानी हो, यहां तक कि नगरपालिका या नगरनिगम या जिला पंचायत या तहसील-तालुका से अपनी जमीन-जायदाद के कागजात हासिल करने हों, तो बिना रिश्वत के काम नहीं चल सकता। बहुत सारे सरकारी विभागों में तो अलग-अलग काम के लिए बकायदा दरें निर्धारित हैं।हर काम में ऊपर से लेकर नीचे तक के कर्मचारियों से कुछ अधिकारियों कुछ मंत्रियों आदि के कमीशन तय होते हैं। इस तरह सरकारी महकमों में भ्रष्टाचार खुल्लम खुल्ला चलता है!यह कोई छिपी बात नहीं है! एक सामान्य आदमी भी किसी मामूली सरकारी कर्मचारी के ठाठ-बाट से अंदाजा लगा सकता है कि उसकी ‘ऊपरी’ कमाई कितनी होती होगी!भ्रष्टाचार की जड़ें सबको पता हैं!मंत्री से लेकर अधिकारी उन्हें पहचानता है, मगर दिक्कत यह है कि भ्रष्टाचार मिटाने का संकल्प सिर्फ नारों तक सिमट कर रह गया है! उसके लिए कोई राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं दिखाई देती। जब खुद मंत्री और उनके सचिव इस खेल में शामिल पाए जाते हैं, तो भ्रष्टाचार को मिटाने की उम्मीद भला किससे की जाए। एक बार चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधियों की संपत्ति में कई सौ गुना की वृद्धि देखी जाती है तो वहीं जिम्मेदारी के पद पर बैठे अधिकारी व कर्मचारी की सम्पतियों में व्रद्धि दे जा सकती हैं बस यह पिस्ता हैं गरीब व मीडियम वर्ग। एक बार सवाल फिर यही उठता है कि आखिर कब तक भ्रष्टाचार की पेट चढ़ता रहेगा गरीब वह मध्यम वर्ग के लोग, फिर दूसरा सवाल यह उठता है कि आखिर भ्रष्टाचार करते हुए पकड़े जाने के बाद क्यों बाहर होकर फिर दोबारा ड्यूटी ज्वाइन कर ली जाती,जबवह भ्रष्टाचार पर पकड़ा ही गया तो फिर कैसे बहाल हो जाता है क्या यहां भी भ्रष्टाचार का बोलबाला है?आखिर क्यों हर सत्तापक्ष भ्रष्टाचार मिटाने के नाम पर ऐसा भेदभाव दिखाता रहा है। इसलिए भ्रष्टाचार की जड़ों पर तब तक प्रहार संभव नहीं है, जब तक कि राजनीतिक नेतृत्व इसे लेकर खुद गंभीर न हो। तब तक यह भ्रष्टाचार कायम रहेगा!!








