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सितारगंज की गल्ला मंडी में 35 वे समागम का किया गया आयोजन इस अवसर पर मुख्य रूप से बाबा लखविंदर सिंह (रतवाड़ा साहिब, चंडीगढ़) से पधारे, जिनकी अगुवाई में समागम संपन्न हुआ। उनके आगमन पर संगत ने फूल मालाओं के साथ स्वागत किया और पूरे पंडाल में “जो बोले सो निहाल” के जयकारों से माहौल गूंज उठा समागम में दूर-दराज से आई संगत ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कीर्तन, शब्द-गायन और गुरबाणी विचारों के माध्यम से उपस्थित श्रद्धालुओं को धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गई इस दौरान बाबा हरभजन सिंह ने कहा कि ऐसे धार्मिक समागमों का उद्देश्य सिख धर्म को आगे बढ़ाना और नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से अवगत कराना है। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को गुरुओं की शिक्षाओं से जोड़ना समय की आवश्यकता है, ताकि वे अपने संस्कारों और परंपराओं को समझ सकें उन्होंने यह भी कहा कि सिख धर्म हमें सेवा, त्याग और मानवता का संदेश देता है हमारी मुख्यप्राथमिकता गरीब और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना है तथा किसी का बुरा न करते हुए सबके साथ प्रेम और भाईचारे से रहना है समागम के अंत में अरदास की गई और संगत के लिए लंगर की व्यवस्था की गई, जिसमें सभी ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य लोग और बड़ी संख्या में सिख समुदाय के सदस्य उपस्थित रहे। इसी के साथ लगी प्रदर्शनी में उपस्थित उस यू एस ए से पहुंचे सरदार देवेंद्र सिंह जी ने बताया कि इस प्रदर्शनी को लगाने का मकसद दिया है कि हमारे इतिहास के बारे में युवा पीडिया को अच्छी तरह से जानकारी होनी चाहिए इस मौके पर हरभजन सिंह भगवत सिंह दर्शन सिंह सुखदेव सिंह राज सिंह जैसा गुरविंदर सिंह बलजिंदर सिंह दूल्हा सिंह आदि उपस्थित रहे।

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