Spread the love

भाजपा मेयर प्रत्याशी ने फाजलपुर महरोला में जुटाया भारी समर्थन

रूद्रपुर । भाजपा मेयर प्रत्याशी विकास शर्मा ने नगर निगम के वार्ड नंबर 25 फाजलपुर महरौला में पार्षद प्रत्याशी श्रीमती प्रियंका गुप्ता एवं संतोष गुप्ता सहित भाजपा के तमाम नेताओं के साथ घर घर जाकर मतदाताओं का समर्थन जुटाया। इस दौरान जगह जगह विकास शर्मा का लोगों ने जोरदार स्वागत करते हुए उन्हें जीत का आश्वासन दिया।

जनसंपर्क के दौरान विकास शर्मा ने कहा कि केन्द्र और प्रदेश की भाजपा सरकार के विकास कार्य किसी से छिपे नहीं हैं। दोनों सरकारें आम जनता के हित में कई जनकल्याणकारी योजनाएं चला रही है, जिनका लाभ हर व्यक्ति तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सबका साथ सबका विकास के लक्ष्य को लेकर चलती है। भाजपा के लिए राष्ट्रहित सर्वोपरि है। धामी सरकार ने एक के बाद एक बड़े फैसले लेकर उत्तराखण्ड को नई पहचान दिलाने का काम किया है, आने वाले दिनों में सीएम धामी के मार्गदर्शन में रूद्रपुर में भी विकास के नये आयाम स्थापित किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भाजपा की सरकार है ऐसे में नगर निगम में भी मेयर और पार्षद भाजपा के होंगे तो विकास की रफ्रतार तेज होगी।

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए भाजपा प्रत्याशी ने कहा कि कांग्रेस मुद्दाविहीन हो चुकी है। चुनाव में मुकाबले से बाहर हो चुकी कांग्रेस अभी अपनी अंदरूनी लड़ाई लड़ रही है, चुनाव से पहले ही कांग्रेस टूटती हुयी नजर आ रही है। जिसके चलते कांग्रेस के कार्यकर्ता लगातार भाजपा में शामिल हो रहे हैं आने वाले दिनों में कांग्रेस के कई बड़े नेता भाजपा का दामन थामेंगे। उन्होंने कहा कि नगर निगम में की कमान भाजपा के हाथों में ही सुरक्षित है।

इस दौरान भाजपा नेता प्रीत ग्रोवर,धीरेंद्र मिश्रा,हरजीत राठी ,अनुज पाठक,देव शर्मा,हरेंद्र शर्मा,कृष्ण शर्मा,अमनदीप सिंह विर्क, विजय तोमर,गगन मुंजाल,आशु, केके त्रिपाठी, नरेश कोली, भीमसेन गुप्ता, गजेंद्र प्रजापति,त्रिलोक चंद, संतोष गुप्ता, प्रियंका गुप्ता, लाल बच्चन गुप्ता, उपेंद्र गुप्ता सहित सैकड़ों लोग मौजूद थे।

ललित मिगलानी
मीडिया प्रभारी

You missed

राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहासलाल बिहारी लालसदियों की गुलामी के बाद आजादी की पहली मांग सन् 1857 ईस्वी में पुरजोर तरीके से उठी उसी समय राष्ट्र के ध्वज बनाने की योजना बनी परंतु पहले स्वतंत्रता संघर्ष के परिणाम को देखकर झंडे की मांग बीच में ही अटक गई । वर्तमान स्वरूप में विद्यमान झंडा कई चरणों से होकर गुजरा है । प्रथम चित्रित ध्वज स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता द्वारा 1904 में बनाया गया था औऱ इसे 7 अगस्त 1906 के कोलकाता में कांग्रेस के अधिवेशन में फहराया गया था ।इस ध्वज को क्षैतिज तीन रंगो लाल, पीला एवं हरे रंग की क्षौतिज पट्टियां बनाया गया था ।ऊपर की ओर हरी पट्टी में आठ कमल थे जिनका रंग सफेद था , नीचे की लाल पट्टी में सूरज और चांद बनाए गए सफेद रंग से बनाये गए थे बीच की पीली पट्टी पर नीले रंग से वंदे मातरम लिखा गया था।द्वितीय ध्वज की बात करें तो सन 1907 ईस्वी में मैडम भीका जी कामा और कुछ अन्य निर्वाचित क्रांतिकारियों ने मिल कर पेरिस में पहली बार फहराया था। तृतीय चित्र ध्वज की बात करें तो 1917 ईस्वी में राजनीतिक संघर्ष के दौरान एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन के दौरान फहराया था। इस ध्वज में पांच लाल और चार हरे क्षैतिज पट्टियां एक के बाद एक और सप्तऋषि के अभिविन्यास में इस पर सात सितारे बने थे ।ऊपरी किनारे पर बायी और यूनियन जैक था । उपर दायी तरफ एक कोने में सफेद अर्द्धचंद्र और सितारा भी था । कांग्रेस के विजयवाड़ा अधिवेशन में एक युवक पिंगली वेंकैया ने एक चौथा झंडा बनाया था जिसमें दो रंगों का लाल और हरा रंग का था जो दो प्रमुख समुदाय अर्थात हिंदू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्व करता था गांधी जी ने 1921 ईस्वी में सुझाव दिया कि भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसे एक सफेद पट्टी मध्य में और सफेद पट्टी के बीच में प्रगति के लिए चलता हुआ चरखा होना चाहिए। वर्ष 1931 में झंडा के इतिहास में एक नया मोड़ आया तिरंगे ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाने का एक प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें तीन रंग उपर केसरिया बलिदान का प्रतीक बीच में सफेद शांति का प्रतिक और अशोक स्तंभ से लिया चक्र इसे विधि चक्र भी कहते हैं जिसमें 24 तिल्लिया प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देती है और सबसे नीचे हरा रंग हरियाली एवं खुशहाली का प्रतीक । तीनों पट्टियां समानुपात में आयताकार जिसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2है। इसे राष्ट्रध्वज के रूप में मान्यता मिली 22 जुलाई 1947 ई. को संविधान सभा ने वर्तमान भारत के तिरंगा को भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया तथा आजादी के बाद भी इसका रंग और महत्व आज भी बना हुआ है ।इस ध्वज को आज 26 जनवरी 1950 को संवैधानिक मान्यता प्राप्त हुआ। ये था राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहास ।

You cannot copy content of this page