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अरविंद पांडे पर लगे आरोपों के बीच राजनीतिक बयानबाज़ी तेज,शांति बनाए रखने की अपील

गदरपुर । क्षेत्र में जनजातीय समाज की जमीनों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। हाल ही में युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुमित्तर भुल्लर ने प्रेस वार्ता कर गदरपुर विधायक अरविंद पांडे पर बुक्सा जनजाति की जमीन को अपने प्रभाव का प्रयोग कर अपने बेटे के नाम कराने का आरोप लगाया है। हालांकि स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का हिस्सा भी माना जा रहा है।
उधम सिंह नगर जनपद में बुक्सा और थारू जनजाति की जमीनों से जुड़े विवाद कोई नए नहीं हैं। गदरपुर,बाजपुर, सितारगंज और खटीमा जैसे क्षेत्रों में वर्षों से भूमि स्वामित्व और कब्जे को लेकर तनाव की स्थिति समय-समय पर सामने आती रही है। उत्तर प्रदेश शासनकाल में जनजातीय जमीनों के नामांतरण पर रोक लगाए जाने के बावजूद कई स्थानों पर अन्य समुदायों के लोग इन जमीनों पर काबिज बताए जाते हैं,जिससे विवाद की स्थितियाँ बनी रहती हैं।
पिछले कुछ वर्षों में इस संवेदनशील विषय पर अपेक्षाकृत शांति रही,लेकिन हालिया राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ने इसे फिर चर्चा में ला दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे मुद्दों को अनावश्यक रूप से हवा देने से सामाजिक तनाव बढ़ सकता है और वर्ग संघर्ष जैसी परिस्थितियां भी उत्पन्न हो सकती हैं।
वहीं विधायक अरविंद पांडे के समर्थकों का कहना है कि उन पर लगाए जा रहे आरोप निराधार और राजनीति से प्रेरित हैं। उनका तर्क है कि बिना ठोस प्रमाण के इस प्रकार के गंभीर आरोप लगाना क्षेत्र की सामाजिक समरसता के लिए उचित नहीं है। समर्थकों का यह भी कहना है कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं और कानूनी तथ्यों की पूरी जाँच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुँचना चाहिए।
स्थानीय बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी अपील की है कि संवेदनशील जमीन विवादों को राजनीतिक लाभ के लिए उछालने के बजाय संवाद और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से समाधान खोजा जाए,ताकि क्षेत्र में शांति और सौहार्द बना रहे।
कुल मिलाकर,गदरपुर में उठे इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राजनीतिक प्रतिस्पर्धा सामाजिक संतुलन से ऊपर हो सकती है या फिर जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी शांति और विश्वास बनाए रखने की है। अब निगाहें प्रशासनिक जाँच और आगे की राजनीतिक प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

गदरपुर में जमीन सौदे पर सियासी हलचल, पक्षकार शांत लेकिन विरोध जारी

गदरपुर में युवा प्रदेश अध्यक्ष सुमित्तर भुल्लर द्वारा उठाया गया जमीनी विवाद इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। दिलचस्प पहलू यह है कि जमीन खरीदने और बेचने वाले पक्ष को इस लेन-देन में कोई दिक्कत नजर नहीं आ रही। इसके बावजूद कुछ कांग्रेसी नेता इस मुद्दे को लेकर लगातार विरोध जता रहे हैं और राजनीतिक माहौल को गर्म बनाए हुए हैं। स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल चर्चा में है कि जब संबंधित पक्षों को कोई परेशानी नहीं तो फिर विरोध किस आधार पर किया जा रहा है। पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्रीय राजनीति और जमीन विवादों के आपसी संबंधों पर नई बहस छेड़ दी है।

गदरपुर की सियासत का अनोखा गणित

गदरपुर विधानसभा की राजनीति जितनी दिखाई देती है, उससे कहीं अधिक जटिल नजर आती है। क्षेत्र में दो अलग-अलग गठबंधन सक्रिय हैं और दिलचस्प बात यह है कि दोनों में ही बीजेपी और कांग्रेस के गुट शामिल हैं।
यानी अपनी ही पार्टी के अंदरूनी विरोधियों से निपटने के लिए दूसरी पार्टी के गुटों का सहारा लिया जा रहा है।
सचमुच,गदरपुर की राजनीति की यह माया सबको हैरान कर रही है।

जनजाति जमीन विवाद बना ‘बोतल का जिन्न’, खुलासा हुआ तो मचेगा हड़कंप

गदरपुर में जमीन से जुड़ा मामला अगर पूरी तरह खुला, तो इसका असर दूर तक दिखाई दे सकता है। चर्चा है कि बोतल में बंद यह जमीनी जिन्न बाहर आया,तो कई लोगों की मुश्किलें बढ़ना तय है। क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे लोग बताए जा रहे हैं जो जनजाति समाज की जमीन पर कब्जा जमाए बैठे हैं। अभी तक दबे स्वर में चल रही यह बात यदि खुलकर सामने आई, तो न सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई का दबाव बढ़ेगा बल्कि राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो सकती है। सवाल यह भी है कि वर्षों से चल रही ऐसी स्थितियों पर अब तक पर्दा क्यों पड़ा रहा। गदरपुर की जमीन अब सिर्फ जमीन नहीं, बल्कि बड़ा सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा बनती नजर आ रही है।

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