जौलजीबी।
सीमा क्षेत्र की जीवन रेखा मानी जाने वाली जौलजीबी–टनकपुर सड़क पर निर्माण कार्य को लेकर उठ रहे सवालों के बीच, लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता (AE) दौलत चंद ने स्पष्ट किया कि गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा।


एई दौलत चंद का बयान:
“जौलजीबी–टनकपुर सड़क क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। हमारी टीम लगातार निगरानी कर रही है। यदि कहीं भी घटिया सामग्री का उपयोग या लापरवाही पाई जाती है, तो ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई होगी। हमारा लक्ष्य है कि यह सड़क उच्च गुणवत्ता के साथ समय पर तैयार हो।”
ग्रामीणों का कड़ा रुख



इस सड़क के निर्माण को लेकर जोगयुड़ा और बगड़ीहाट के ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि घटिया सामग्री का उपयोग हुआ तो वे सड़क पर उतरकर विरोध करेंगे।
ग्राम जोगयुड़ा के ललित पाल और गोविंद पाल ने कहा:
“यदि सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया, तो हम इसका पुरजोर विरोध करेंगे। यह मार्ग अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटा है और हमारी सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। इसके अलावा, यह सड़क हमारी जीवन रेखा बनेगी और युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्रदान करेगी।”
कल्याण सिंह जी का कहना
“यह सड़क सिर्फ आवाजाही का साधन नहीं है, बल्कि हमारे क्षेत्र की रीढ़ है। आने वाले समय में यही सड़क हमारे व्यापार और पर्यटन को गति देगी। इसलिए हम चाहते हैं कि निर्माण में उच्च गुणवत्ता का पालन किया जाए।”
सुरक्षा और व्यापारिक महत्व
यह सड़क भारत–नेपाल अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सुरक्षा तंत्र मजबूत होगा और आपातकालीन स्थिति में त्वरित कार्रवाई संभव होगी।
व्यापारिक दृष्टि से भी यह सड़क अहम है। जौलजीबी का ऐतिहासिक मेला और भारत–नेपाल के बीच पारंपरिक व्यापार इसी मार्ग पर निर्भर करता है। सड़क सुगम होने से स्थानीय किसानों और व्यापारियों को अपने उत्पाद बाजार तक पहुँचाने में आसानी होगी, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
ग्रामीणों की निगरानी जारी
ग्रामीणों का कहना है कि वे हर गतिविधि पर नजर रख रहे हैं। उनका संदेश स्पष्ट है– नियमों का पालन न हुआ तो वे आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे।






