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अश्वनी दीक्षित खबर पड़ताल

सितारगंज खटीमा में घरेलू गैस वितरण की अव्यवस्था और उपभोक्ताओं की परेशानी को उजागर करने वाले ईटीवी भारत उत्तराखण्ड के पत्रकार दीपक फुलेरा के खिलाफ कोतवाली खटीमा में धारा 353(1) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज किए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है और इसे लेकर सितारगंज सहित पूरे क्षेत्र के पत्रकारों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। पत्रकारों का कहना है कि जब जनता गैस सिलेंडर के लिए घंटों लाइन में खड़ी होकर परेशान हो रही थी और कई जगह कृत्रिम किल्लत की स्थिति पैदा हो रही थी, तब पत्रकार ने केवल जनसरोकार से जुड़ी सच्चाई को सामने लाने का काम किया। उल्लेखनीय है कि 23 मार्च को जिलाधिकारी ने जिले और तहसील स्तर के अधिकारियों, गैस एजेंसी प्रबंधकों और गैस वितरण के लिए बनाए गए नोडल अधिकारियों की बैठक लेकर स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सभी उपभोक्ताओं तक गैस की होम डिलीवरी सुनिश्चित की जाए और लाइन लगाकर गैस वितरण पर सख्त रोक लगाई जाए, साथ ही इन आदेशों की जानकारी 24 मार्च को विभिन्न समाचार पत्रों में भी प्रकाशित हुई और संबंधित विभागों द्वारा पोस्टर लगाकर लोगों को अवगत कराया गया। इसके बावजूद 25 मार्च को खटीमा में कथित रूप से अधिकारियों के आदेशों की अनदेखी करते हुए गैस एजेंसी प्रबंधक और ठेकेदार की मिलीभगत से उपभोक्ताओं को लाइन में लगाकर गैस वितरित की गई, जिससे कृत्रिम किल्लत का माहौल बना और आरोप है कि उपभोक्ताओं से प्रति सिलेंडर लगभग 20 रुपये तक की वसूली भी की गई, जिससे कई दिनों में लाखों रुपये के लेन-देन की आशंका जताई जा रही है। पत्रकारों का कहना है कि इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए वीडियो फुटेज भी उपलब्ध है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर जांच एजेंसियों को दिया जा सकता है, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से इस अव्यवस्था और संभावित घोटाले के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने के बजाय खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकार पर ही मुकदमा दर्ज कर दिया गया, जिससे सरकार के जीरो टॉलरेंस के दावों पर भी सवाल उठ रहे हैं। इस प्रकरण को प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए सितारगंज के पत्रकारों ने महामहिम राज्यपाल उत्तराखण्ड से पूरे मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराने, पत्रकार दीपक फुलेरा पर दर्ज मुकदमा तत्काल वापस लेने, गैस वितरण में गड़बड़ी करने वाले एजेंसी प्रबंधक, ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा होम डिलीवरी के नाम पर उपभोक्ताओं से वसूली गई अवैध धनराशि की जांच कर उसे वापस कराने की मांग उठाई है। पत्रकारों ने यह भी आशंका जताई है कि मुकदमा दर्ज कराने वाले व्यक्ति की गैस ठेकेदार से सांठगांठ हो सकती है, जिसकी भी गहन जांच आवश्यक है। इस संबंध में सितारगंज के पत्रकार राजेंद्र तिवारी, शकर दत्त शर्मा, शेखर पंत,अविनाश श्रीवास्तव, राहुल कनोजिया, चरन सिंह सरारी, हनीफ बाबा, गुरनाम सिंह करनावल, अश्वनी दीक्षित, दीपक भारद्वाज, कासिम असारी, अमर सिंह यादव, रमेश यादव, लाइक अंसारी, इमरान खान, अहसान अंसारी, मो. आरिफ,विकास गुप्ता, कपिल,रिम्पी,अनीश रज़ा,नारायण सिंह रावत सहित दर्जनों पत्रकारों ने संयुक्त रूप से आवाज उठाते हुए कहा कि यदि जल्द निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो पत्रकार समाज व्यापक स्तर पर आंदोलन करने को भी मजबूर हो सकता है।जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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