
गदरपुर/देहरादून । समाज में ट्रांसजेंडर समुदाय को अपनी पहचान बनाने के लिए आज भी कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन देहरादून की अदिति शर्मा ने इन तमाम चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए “निवाला प्यार का” नाम से फूड वैन शुरू कर अपनी अलग पहचान बनाई है। अदिति का यह प्रयास न सिर्फ स्वरोजगार की मिसाल है,बल्कि समाज की सोच बदलने की एक मजबूत कोशिश भी है।
अदिति शर्मा बताती हैं कि उनके जीवन का सफर आसान नहीं रहा। समाज की तिरछी नजरें, उपेक्षा और अस्वीकार्यता उनके साथ हमेशा रही, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। अदिति का मानना है कि ट्रांसजेंडर होना कोई कमजोरी नहीं,बल्कि आत्मसम्मान के साथ जीने की एक अलग पहचान है।


एक ट्रक से शुरू हुई एक नई कहानी
अदीति ने अपनी फूड वैन का नाम “निवाला प्यार का” रखा। यह नाम केवल एक व्यवसाय नहीं,बल्कि एक संदेश है—प्यार और सम्मान का। शुरुआत में लोग हैरानी से देखते थे,सवाल करते थे,लेकिन समय के साथ उनके काम और व्यवहार ने लोगों की सोच बदलनी शुरू कर दी।
छोटे गांव से बड़ी सोच तक
अदिति शर्मा का जन्म उत्तराखंड के एक छोटे से गांव में हुआ। बचपन से ही उन्हें यह एहसास होने लगा था कि वे खुद को दूसरों से अलग महसूस करती हैं। समाज और परिवार की अपेक्षाओं के बीच खुद को पहचानना उनके लिए कठिन था, लेकिन उन्होंने अपनी सच्चाई को स्वीकार किया।
दिल्ली से देहरादून तक का सफर
अपने सपनों को पूरा करने के लिए अदिति पहले दिल्ली गईं। वहां उन्होंने अलग-अलग जगहों पर काम किया,लेकिन स्थिरता नहीं मिल पाई। इसके बाद उन्होंने खुद का काम शुरू करने का फैसला किया और देहरादून में फूड वैन की शुरुआत की।
अदिति से मिलती है ये प्रेरणा
डर तोड़ो, ट्रांसजेंडर सिर्फ नाच या बधाई तक सीमित नहीं।
खुद पर भरोसा रखो,पहचान बाहर नहीं,अंदर से बनती है।
सपनों की कोई सीमा नहीं होती।
समाज का बदलाव धीरे-धीरे होता है,लेकिन प्रयास जरूरी है।
सही समय पर मिला सहयोग जिंदगी बदल सकता है।
कानूनी पहचान और समाज से लड़ाई
2021 में अदिति को उत्तराखंड की पहली ट्रांसजेंडर के तौर पर कानूनी पहचान मिली। समाज कल्याण विभाग और संबंधित अधिकारियों के सहयोग से उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिला। इसके बाद उनके आत्मविश्वास में और मजबूती आई।
जब वैन बनी कैफे
फूड वैन की सफलता के बाद अब अदिति एक कैफे शुरू करने की तैयारी में हैं। उनका उद्देश्य है कि ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों को रोजगार दिया जाए और उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए।अदीति का कहना है कि “निवाला प्यार का” अब सिर्फ एक फूड वैन नहीं,बल्कि एक सोच बन चुका है।
अपनी दिल की सुनी
अदिति कहती हैं कि उन्होंने हमेशा अपने दिल की सुनी। आज जब वे फूड वैन में खड़ी होकर ग्राहकों को खाना परोसती हैं,तो उन्हें इस बात का सबसे ज्यादा सुकून मिलता है कि समाज धीरे-धीरे उन्हें स्वीकार कर रहा है।








