
पार्वती आज बहुत देर से उठी थी रात में वह ढंग से सो न पायी थी बाल बेढंगे थे बिखरकर उसके चेहरे को ढांप रहे थे आंखों अभी उनींदी थी वह अभी अपनी आंखों को अपने हाथों से मल रही थी, मां ने देखते ही कहा, उठ गयी मोड़ी ।चल इधर आ,मां ने उसके बाल पकड़े और उसकी कसकर चोटी करने लगी हल्के,,, माई, दुःखता है उसकी आंखों में पानी आ गया था पार्वती आज बड़ी उथापोह में थी उसने बहुत मुश्किल से हाईस्कूल की परीक्षा पास की थी उसकी प्रिंसिपल राधिका ने उसे पढ़ने में बहुत मदद की थी वह पढ़ाई में तेज थी वह आगे पढ़ना चाहती थी नौकरी कर अपने परिवार की मदद करना चाहती थी वह अपने छोटे भाई -बहनो से बहुत प्यार करती थी वह बहुत पिछड़े आदिवासी इलाके की एक दलित परिवार से थीं । परिवार बहुत मुफलिसी के दिन काट रहा था वह चार बहनों ओर दो भाईयों में सबसे बड़ी थी। बिचौलिए ने उसके नशेड़ी पिता व घरवालों को पैसे के लालच देकर में एक उम्रदराज आदमी से उसका विवाह तय कर दिया था पार्वती बड़ी पेशोपेश में थी अभी तक उसे विवाह के मायने ही न पता थे बड़ी अल्हड़ थी वह उसके घर वाले उसके लिए लाल चुन्नी,नये कपड़े व चांदी के कुछ गहने शहर से खरीदकर ले आये थे बार -बार जिसे देखकर वह हैरान व परेशान थी बार-बार उठ उठ कर उस समान को देख रही थी जैसे-जैसे विवाह का दिन नजदीक आने लगे देह पर उसका नियंत्रण न रहा था उसकी सांसें तेज हो रही थी दिल लरजने लगा था आज उसके विवाह का दिन था एक अधेड़ और कुछ लोग उसके घर उसे ब्याहने पहुंचे थे ।यह बात जब उसकी प्रिंसिपल राधिका को पता चली तो वह कमीशनर व कुछ पुलिसकर्मी लेकर उसके घर पहुंच गयी उनके घरवालों को बहुत डांटा-फटकारा व विवाह को रूकवाया,आये सभी लोगों को कानून का डर देकर छोड़ा गया पार्वती के घर वालो को समझाया यह विवाह उनकी बेटी के भविष्य के लिए ठीक नहीं है वह अभी नादान है पार्वती अभी पढ़ना चाहती है प्रिंसिपल व कमीशनर ने पार्वती के सिर पर प्यार से हाथ फेरा कमीशनर ने उसकी ढोड़ी को ऊपर उठाया वह लजाती आंखों से कभी कमीशनर व कभी प्रिंसिपल को देखने लगी कमीशनर व प्रिंसिपल ने पार्वती कीआगे की पढ़ाई में उन्हें आर्थिक मदद देने का वादा किया अब पार्वती की आंखों में अपने भविष्य का उजाला था वह बहुत खुश थी उसके अरमानों को पंख जो लगने वाले थे वह एक दु़स्वप्न से दूर हो गयी थी ।प्रस्तुति -नरेश छाबड़ाआवास-विकास रूद्रपुर 8










