
न्याय न मिलने पर विधवा की आत्महत्या की चेतावनी,


एसडीएम कार्यालय में हड़कंप
विधायक के भाई पर जमीन धोखे से लीज पर लेने का आरोप,जांच समिति गठित
गदरपुर/केलाखेड़ा । भूमि विवाद को लेकर बुधवार को उप जिलाधिकारी कार्यालय में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक विधवा महिला ने न्याय न मिलने पर आत्महत्या की चेतावनी दे डाली। इस घटना से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया और मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच समिति गठित कर दी गई।
विधवा महिला परमजीत कौर ने एसडीएम बाजपुर को सौंपे ज्ञापन में विधायक अरविंद पांडेय और उनके अनुज अमर पांडेय पर आरोप लगाया कि उनकी भूमि को धोखे से लंबे समय के लिए लीज पर ले लिया गया है। महिला का कहना है कि वह लगातार न्याय के लिए भटक रही हैं, लेकिन अब तक उन्हें कोई ठोस राहत नहीं मिली। मानसिक तनाव से जूझ रही महिला ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र न्याय नहीं मिला तो वह आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर होंगी।
महिला की चेतावनी के बाद तहसील परिसर में हड़कंप मच गया। एसडीएम अमृता शर्मा ने स्थिति को संभालते हुए महिला से किसी भी तरह का अनुचित कदम न उठाने की अपील की और भरोसा दिलाया कि मामले की निष्पक्ष व पारदर्शी जांच की जाएगी। उन्होंने तहसीलदार के नेतृत्व में जांच समिति गठित करने की घोषणा की।
विधायक बोले—निष्पक्ष जांच से नहीं भागूंगा
घटनाक्रम की जानकारी मिलते ही विधायक अरविंद पांडेय आनन-फानन में बाजपुर पहुंचे। उन्होंने कहा कि वे किसी भी निष्पक्ष जांच से पीछे नहीं हटेंगे और सच्चाई सामने आनी चाहिए। विधायक ने स्पष्ट किया कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो वे हर प्रकार की कार्रवाई के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में आत्महत्या की घटनाओं ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। केवल आरोपों के आधार पर किसी की छवि खराब करना भी गलत है और किसी विवाद के चलते जान गंवाना भी अत्यंत दुखद। विधायक ने जोर देते हुए कहा कि भूमि या संपत्ति विवादों में आत्महत्या की धमकी एक गलत परंपरा को जन्म देती है, जिसे रोकना जरूरी है।
विधायक अरविंद पांडेय ने यहां तक कहा कि वे स्वयं चाहते हैं कि पूरे प्रकरण की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए। चाहे सीबीआई जांच हो, एसआईटी या मजिस्ट्रेटी जांच—हर स्तर पर वे पूरा सहयोग देंगे।
30 साल की पंजीकृत लीज का दावा, सोसायटी ने रखा पक्ष
दूसरी ओर, विद्या ज्योति एजुकेशनल सोसायटी की ओर से सदस्य अमरजीत पांडेय ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि 3 दिसंबर 2019 को भूमि स्वामिनी परमजीत कौर के साथ 30 वर्षों की पंजीकृत लीज विधिवत प्रक्रिया के तहत की गई थी। यह पूरा अनुबंध बाजपुर रजिस्ट्रार कार्यालय में स्टांप शुल्क और सभी कानूनी औपचारिकताओं के साथ संपन्न हुआ था।
अमरजीत पांडेय के अनुसार, शिक्षण संस्थान की स्थापना के उद्देश्य से ली गई यह लीज पूरी तरह वैध और पारदर्शी है। भवन निर्माण जब लिंटर स्तर तक पहुंच गया, तभी अचानक महिला पक्ष की ओर से विरोध शुरू हुआ। कई बार मध्यस्थता के प्रयास भी हुए, लेकिन हर बार सहमति बनने के बाद उससे पीछे हटना समस्या का कारण बना।
उन्होंने महिला के अशिक्षित होने के आरोप को भी खारिज करते हुए कहा कि लीज डील में उनका व्यस्क पुत्र गवाह के रूप में दर्ज है और पंजीकरण के दौरान अंगूठे के निशान विधिवत अभिलेखों में सुरक्षित हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि कोई भी संस्था चार-पांच साल की लीज पर करोड़ों रुपये का शैक्षणिक ढांचा खड़ा नहीं करती।
अमरजीत पांडेय ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक विरोधियों के उकसावे में आकर बुजुर्ग महिला को मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि लीज के अनुसार तय किराया नियमित रूप से नकद और बैंक खाते के माध्यम से दिया गया है, जिसके सभी रिकॉर्ड उपलब्ध हैं।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब सभी की नजरें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और पीड़ित महिला को न्याय किस रूप में मिलता है।








