
काशीपुर -यह यात्रा 1989,से प्रारंभ हुई और अब 2026 में अपने गंतव्य पर पहुंच रही है.
आज संडे है ,तो मन में ख्याल आया क्यों ना 37 साल के पुलिस का सफर का आकलन किया जाए.
आकलन तो आप हमेशा यही चाहेंगे कि दूसरे लोग करे,पर मेरा मानना है अपनी वास्तविक जिंदगी का निचोड़ आपसे अच्छा और कोई नहीं कर सकता.
दुनिया को आप कुछ भी प्रदर्शित करे,पर आपकी अंतरात्मा जानती है कि आप स्वयं किस पायदान पर खड़े है,आप ने क्या किया,आप क्या कर सकते थे,आप क्या नहीं कर पाए ,आपको कितने अवसर मिले,कितने अपने अवसरों को व्यर्थ किया ,और कितने अवसरों में आपकी प्रतिभाओं का सही आकलन किया गया.
आपसे अच्छा न्यायधीश ,अपने लिए कोई नहीं हो सकता.
मैने अपने सेवाकाल में बहुत उतार -चढ़ाव देखे ,और सही क्यों तो उतार ज्यादा और शिखर कम देखे.
कही जगह सोचा कि अपनी प्रतिभाओं का न्याय ,जिस तरह कर सकता था,कही ना कही कमी रह गई.सुधार की गुंजाइश हमेशा रहती है,और किया जा सकता था,पर आज के परिपेक्ष्य में अब यह कहना बेमानी होगी ,क्योंकि वक्त गुजर चुका है,और वक्त के व्यतीत होने पर मलाल के सिवा कुछ नहीं होता,इसलिए वक्त हमारा सबसे कीमती धरोहर है,उसे आप कभी व्यर्थ ना जाने दे.जिसने वक्त को सम्मान दिया,वक्त ने उसकी कद्र की.
मैने अपनी सेवाकाल में पुलिस के कालखंड का परिवर्तन होते देखा,मैने परंपरागत पुलिसिंग देखी और तकनीक से सुसज्जित पुलिस को भी देखा.
मैने डकैती,लूट,हत्या जैसे अपराध,दंगे, सांप्रदायिक और जातिगत तनाव ,को भी डील किया और अब तो डिजिटल दुनिया है ,और अप्रत्याशित रूप से इसकी चुनौतियों का भी अनुभव किया.
पुलिस का सार आज भी वही है ,जो 1990 में था,आप समाज को कितना न्याय,दिला सकते है,कितनी जल्दी दिला सकते है,और आपकी अपराध के प्रति प्रतिक्रिया किया है.
मैने हमेशा माना,पुलिस अधिकारी को व्यवहार में सरल,भाषा में मृदुल और कानून के पालन में कठोर होना चाहिए.
समाज पुलिस अधिकारी की तरफ बहुत सम्मान से देखता है,हमारा परम कर्तव्य बनता है कि हमारी वर्दी देखकर उसमें आत्मविश्वास आए ना कि डर और खौफ.
संवेदनशीलता और धैर्य एक पुलिस अधिकारी का आभूषण होता है,और हर पुलिस कर्मचारी के लिए यह सफल होने के लिए अत्यंत आवश्यक होता है.
आज जब पुलिस के पास श्रोत भी है,तकनीक भी और जनशक्ति में भी बढ़ोतरी हो रही है तो हमें अपने आप को समय के साथ बदलाव तो करना होगा पर इस बात का हमेशा स्मरण में रखना होगा जो पुलिस का मूलभूत सार है ,जन -सेवा,जन -कल्याण और जन-समर्पण उसे कभी नहीं भूलना होगा.आखिर ईश्वर की कृपा से हमें वर्दी मिली है,जो हमारी आन ,बान और शान है और इसकी इज्जत पर कभी आंच ना आए ऐसा सार्थक और सबल प्रयास हमेशा करते रहना होगा.
मुझे ,ईश्वर जितने भी जन्म दे ,हमेशा मुझे इस खाकी से सुसज्जित करे ऐसी मेरी कामना हमेशा रहेगी और एक बात -पुलिस अधिकारी कभी रिटायर नहीं होता है,वो सिर्फ वर्दी एक उम्र के बात धारण भले ही ना कर सकता है,और उसके बाद उसे निहार सकता है,पर उसके अंदर का पुलिस अधिकारी तो हमेशा जीवित रहता है,और उसकी अंतिम सास तक उसके साथ रहता है.अंग्रेजी में एक कहावत है,Once a Cop,Always a copआज आपके साथ अपने साढ़े तीन दशक की पुलिस की वर्दी में अपनी फोटो साझा कर रहा हूँ।











