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काशीपुर -समाजसेवी राजबीर सिंह भारतीय ने मनीमाजरा (सेक्टर 13) के विकास कार्यों को लेकर नगर निगम प्रशासन और संबंधित अधिकारियों पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि मनीमाजरा की 3 लाख से अधिक की आबादी को सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों के लिए एक ओपन एयर थिएटर की सख्त जरूरत है, लेकिन प्रशासन की अनदेखी के कारण यह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट सालों से ठंडे बस्ते में पड़ा है। पिछले दिनों प्रशासक महोदय ने पुरे मनीमाजरा का औचक निरीक्षण किया था जिसमें उन्होंने शिवालिक गार्डन भी आना था तथा ओपन एयर थियेटर के लिए जगह का मौका मुआयना स्वयं देखना था, पर उस दिन मनीमाजरा हॉस्पिटल और इंदिरा कालोनी पार्क के निरीक्षण के बाद शिवालिक गार्डन आए ही नहीं और लोगों को जबरदस्त निराशा हाथ लगी। ‘ओपन एयर थियेटर’ का सपना बनते बनते टुटता हुआ नजर आया। वहां शिवालिक गार्डन में पहुंचे लोगों में नाराजगी व निराशा देखी गई।

मनीमाजरा ईडब्ल्यूएस वेलफेयर एसोसिएशन (MERWA) के उपाध्यक्ष एवं समाजसेवी राजबीर सिंह भारतीय ने प्रशासन और नगर निगम के ढुलमुल रवैये पर कड़ा रोष जताते हुए शिवालिक गार्डन में लंबित ओपन एयर थिएटर के निर्माण की मांग एक बार फिर दोहराई है। उनका कहना है कि यह प्रोजेक्ट कागजों पर तथा प्रशासन के संज्ञान में कई वर्षों से स्वीकृत है, क्योंकि इस प्रोजेक्ट के लिए पूर्व चंडीगढ़ कार्पोरेशन के पूर्व मेयर सुरेन्द्र सिंह ने अपने कार्यकाल में इसको प्रशासन के संज्ञान में लाने का काम किया था, लेकिन धरातल पर अब तक एक ईंट भी नहीं लगाई गई है।

​वर्षों पुराना इंतजार:- ऑल मनीमाजरा वेल्फेयर एशोसियेशन के प्रधान एस एस परवाना ने बताया कि शिवालिक गार्डन में ओपन एयर थिएटर की योजना को प्रशासन के संज्ञान में आए कई साल बीत चुके हैं। बावजूद इसके, संबंधित विभाग इस प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाले हुए है। प्रशासक गुलाबचंद कटारिया जी के मनीमाजरा आने पर आश बंधी जो उसी दिन निराशा में तब्दील हो गई। दुर्भाग्यपूर्ण है।

बजट और योजना का सवाल: उन्होंने सवाल उठाया है कि जब प्रोजेक्ट प्रशासन एवं कार्पोरेशन के संज्ञान में है , तो इसके निर्माण में देरी क्यों की जा रही है? क्या आवंटित बजट का सही इस्तेमाल नहीं हुआ या प्रशासनिक उदासीनता मनीमाजरा की जनता-जनार्दन की सुविधा पर भारी पड़ रही है।

मनीमाजरा ईडब्ल्यूएस रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन के चैयरमैन सुभाष धीमान ने कहा है कि यह प्रोजेक्ट केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि मनीमाजरा की जनता की भावना और उनकी सांस्कृतिक पहचान का सवाल है। अगर प्रशासन ने जल्द ही इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो वे मनीमाजरा की स्थानीय जनता के साथ मिलकर ओपन एयर थियेटर बनाने की आवाज बुलंद करने पर मजबूर होंगे ।

​एसोसिएशन के पदाधिकारी राजबीर सिंह भारतीय के साथ चैयरमैन सुभाष धीमान, ऑल मनीमाजरा वेल्फेयर एशोसियेशन के प्रधान एस एस परवाना, समाजसेवी अरुण कुमार वशिष्ठ एडवोकेट, मोली जागरा से समाजसेवी एवं पास्टर रॉबर्ट विलियम और सुभाष नगर से महिला समाजसेवी पुजा रॉय ने सयुंक्त बयान में प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए कहा कि मनीमाजरा 3 लाख से भी घनी आबादी वाला क्षेत्र है, जहां प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। शिवालिक गार्डन न केवल सेक्टर-13 बल्कि पूरे मनीमाजरा के लोगों के लिए मनोरंजन और सैर-सपाटे का मुख्य केंद्र है। यहाँ “ओपन एयर थिएटर” बनने से स्थानीय कलाकारों, स्कूली बच्चों और युवा प्रतिभाओं को अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए एक उचित मंच मिलेगा।

​सयुंक्त रुप से सब की मांग के मुख्य बिंदु:-
सांस्कृतिक विकास:- ओपन एयर थिएटर के माध्यम से स्थानीय स्तर पर नाटक, कवि सम्मेलन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को मिलेगा बढावा।

​बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों के लिए उपयोगी:-शाम के समय वरिष्ठ नागरिकों के लिए भजन-कीर्तन और बच्चों के लिए रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन सुगम हो सकेगा।

प्रशासन से अपील:- एसोसिएशन ने चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम से अनुरोध किया है कि शिवालिक गार्डन के सौंदर्यकरण प्रोजेक्ट के तहत इस थिएटर के लिए बजट आवंटित किया जाए।

उन्होंने कहा कि मनीमाजरा के निवासियों को छोटे कार्यक्रमों के लिए भी दूर जाना पड़ता है। शिवालिक गार्डन में पर्याप्त जगह उपलब्ध है, यदि यहाँ एक ओपन एयर थिएटर बनता है, तो यह सेक्टर-13 और पूरे मनीमाजरा की एक बड़ी जरूरत को पूरा करेगा।”

सबने मिलकर प्रशासक महोदय, प्रशासन एवं कार्पोरेशन से पुरजोर अपील की है कि बिना देरी के जल्द से जल्द इस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य शुरू करने के लिए टेंडर प्रक्रिया या जमीनी कार्यवाही शुरू की जाए। हमें पुरा यकीन भरोसा और विश्वास है कि मनीमाजरा के निवासियों को अपनी आवाज बुलंद करने के लिए सड़कों पर उतरने और प्रदर्शन करने के लिए प्रशासन हमें मजबूर नहीं करेगा। अगर कार्य जल्द पूरा होता है तो यह ओपन एयर थियेटर, चंडीगढ़ की शान में “स्मार्ट सिटी” बनने में भी मील का पत्थर साबित होगा।
इस ज्वलंत मुद्दे पर शहर के अनेक गणमान्य लोगों, युवाओं, बच्चों व महिलाओं ने भी अपने-अपने स्तर पर आवाज उठाई है।

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राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहासलाल बिहारी लालसदियों की गुलामी के बाद आजादी की पहली मांग सन् 1857 ईस्वी में पुरजोर तरीके से उठी उसी समय राष्ट्र के ध्वज बनाने की योजना बनी परंतु पहले स्वतंत्रता संघर्ष के परिणाम को देखकर झंडे की मांग बीच में ही अटक गई । वर्तमान स्वरूप में विद्यमान झंडा कई चरणों से होकर गुजरा है । प्रथम चित्रित ध्वज स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता द्वारा 1904 में बनाया गया था औऱ इसे 7 अगस्त 1906 के कोलकाता में कांग्रेस के अधिवेशन में फहराया गया था ।इस ध्वज को क्षैतिज तीन रंगो लाल, पीला एवं हरे रंग की क्षौतिज पट्टियां बनाया गया था ।ऊपर की ओर हरी पट्टी में आठ कमल थे जिनका रंग सफेद था , नीचे की लाल पट्टी में सूरज और चांद बनाए गए सफेद रंग से बनाये गए थे बीच की पीली पट्टी पर नीले रंग से वंदे मातरम लिखा गया था।द्वितीय ध्वज की बात करें तो सन 1907 ईस्वी में मैडम भीका जी कामा और कुछ अन्य निर्वाचित क्रांतिकारियों ने मिल कर पेरिस में पहली बार फहराया था। तृतीय चित्र ध्वज की बात करें तो 1917 ईस्वी में राजनीतिक संघर्ष के दौरान एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन के दौरान फहराया था। इस ध्वज में पांच लाल और चार हरे क्षैतिज पट्टियां एक के बाद एक और सप्तऋषि के अभिविन्यास में इस पर सात सितारे बने थे ।ऊपरी किनारे पर बायी और यूनियन जैक था । उपर दायी तरफ एक कोने में सफेद अर्द्धचंद्र और सितारा भी था । कांग्रेस के विजयवाड़ा अधिवेशन में एक युवक पिंगली वेंकैया ने एक चौथा झंडा बनाया था जिसमें दो रंगों का लाल और हरा रंग का था जो दो प्रमुख समुदाय अर्थात हिंदू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्व करता था गांधी जी ने 1921 ईस्वी में सुझाव दिया कि भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसे एक सफेद पट्टी मध्य में और सफेद पट्टी के बीच में प्रगति के लिए चलता हुआ चरखा होना चाहिए। वर्ष 1931 में झंडा के इतिहास में एक नया मोड़ आया तिरंगे ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाने का एक प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें तीन रंग उपर केसरिया बलिदान का प्रतीक बीच में सफेद शांति का प्रतिक और अशोक स्तंभ से लिया चक्र इसे विधि चक्र भी कहते हैं जिसमें 24 तिल्लिया प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देती है और सबसे नीचे हरा रंग हरियाली एवं खुशहाली का प्रतीक । तीनों पट्टियां समानुपात में आयताकार जिसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2है। इसे राष्ट्रध्वज के रूप में मान्यता मिली 22 जुलाई 1947 ई. को संविधान सभा ने वर्तमान भारत के तिरंगा को भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया तथा आजादी के बाद भी इसका रंग और महत्व आज भी बना हुआ है ।इस ध्वज को आज 26 जनवरी 1950 को संवैधानिक मान्यता प्राप्त हुआ। ये था राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहास ।

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