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  • महापौर ने अटरिया मंदिर के सचिव अरविंद शर्मा को किया सम्मानित

रुद्रपुर। अटरिया मंदिर परिसर के समीप नमाज अदा कर शहर का सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ महापौर विकास शर्मा ने भी सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। इस पूरे प्रकरण में मंदिर की गरिमा और सनातन धर्म की मर्यादा की रक्षा के लिए आगे आए अटरिया मंदिर समिति के सचिव अरविंद शर्मा का महापौर विकास शर्मा ने अपने आवास पर स्वागत किया और उन्हें सम्मानित किया। महापौर ने न केवल अरविंद शर्मा और उनकी टीम के साहस की सराहना की, बल्कि स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि रुद्रपुर की शांत फिजा में जहर घोलने वाले असामाजिक तत्वों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।महापौर ने इस घटना को एक गहरी सोची-समझी साजिश करार देते हुए कहा कि अटरिया मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लाखों लोगों की अटूट श्रद्धा का केंद्र है, जहाँ इस प्रकार का कृत्य करना सीधे तौर पर धार्मिक उन्माद फैलाने की कोशिश है। महापौर विकास शर्मा ने घटनाक्रम की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मंदिर सचिव अरविंद शर्मा तीन दिनों से उक्त व्यक्ति को वहां नमाज पढ़ने से लगातार मना कर रहे थे, इसके बावजूद बार-बार उसी स्थान पर आकर धार्मिक क्रियाकलाप करना यह सिद्ध करता है कि इसके पीछे कुछ अराजक तत्वों का हाथ है। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि कुछ लोग अपने तुच्छ राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति के लिए शहर को दंगों की आग में झुलसाना चाहते हैं, जिन्हें बेनकाब करना नितांत आवश्यक है। महापौर ने बताया कि इस संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से भी विस्तार से वार्ता हुई है और मांग रखी है कि मामले की तह तक जाकर उन चेहरों को सामने लाया जाए जो पर्दे के पीछे से इस घिनौने खेल का संचालन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नमाज पढ़ने वाले व्यक्ति के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल खंगाली जाए ताकि उसके संपर्कों का खुलासा हो सके।महापौर ने कहा कि उत्तराखंड में धाकड़ धामी की सरकार है, जहाँ सबका साथ-सबका विकास के मंत्र पर कार्य होता है, लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि किसी को दूसरे की आस्था के साथ खेलने की छूट दे दी जाए। उन्होंने कहा कि जो लोग इस घटना के बाद आरोपी के समर्थन में सड़कों पर उतरे और विरोध प्रदर्शन कर दंगे भड़काने की धमकियां दीं, उन पर भी सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। अरविंद शर्मा के व्यवहार पर टिप्पणी करते हुए महापौर ने कहा कि मंदिर की मर्यादा पर प्रहार देख किसी भी सनातनी का आक्रोशित होना स्वाभाविक है; उन्होंने जो भी किया वह अपनी अपनी धार्मिक आस्था की रक्षा के लिए किया और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। महापौर ने अंत में संकल्प दोहराया कि रुद्रपुर की एकता को खंडित करने के किसी भी प्रयास को सफल नहीं होने दिया जाएगा और सनातन धर्म की ध्वजा को झुकने नहीं देंगे।

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