महात्मा बुद्ध कहते थे की दुनिया में दुःख का कारण है तृष्णा, तृष्णा को समाप्त करके ही दुःख को समाप्त किया जा सकता है जिंदगी में ज्यादातर जरूरते पूरी हो सकती है परन्तु इच्छाएं व वासनाएं कभी पूरी नहीं हो सकती लंकापति रावण जीवनपर्यंत लोभ,तृष्णा व अंहकार के मद में डूबा रहा परन्तु उसकी कामनाएं व वासनाएं कभी पूर्ण न हो सकी। मनुष्य के जीवन में हमेशा कुछ न कुछ मांग बनी रहती है मुझे यह वस्तु या पद,या ईनाम मिल जाए तो मैं खुश हो जाऊंगा परन्तु वह वस्तु या पद मिलने पर कुछ क्षणिक सुख मिलता है तो ओर अधिक सुख की इच्छा भासने लगती है क्योंकि संसार की वस्तुओं में तृप्ति व सुख है ही नहीं। मनुष्य को अपने आन्तरिक संतोष द्वारा ही सुख व आनन्द प्राप्त हो सकता है गुरु नानक देव जी कहते हैं कि दुनिया को जीतने से पहले अपने मन को जीतना जरूरी है यदि मन को जीत लिया तो दुनिया की हर वस्तु अर्थहीन व बेकार लगेगी। एक पल एक दिन को, एक दिन एक जीवन को, एक जीवन एक दुनिया को बदल सकता है मनुष्य के लिए बीता हुआ कल कितना ही मुश्किल क्यों न हो परन्तु हर दिन नया सवेरा नयी उम्मीद लेकर आता है मनुष्य के लिए स्वास्थ्य सबसे बड़ा उपहार है संतोष सबसे बड़ा धन, वफादारी सबसे बड़ा संबंध बन पड़ता है जीवन ईश्वर का दिया एक अनुपम वरदान है इसे अंतिम स्वांस तक खुशी से जिएं दुसरो का जीवन भी संवारें आपका जीवन कितना भी कठिनाईयों भरा हो सकता है आप हिम्मत न हारें जीवन की चुनौतियो को सहर्ष स्वीकार करे और अपनी जीवन यात्रा को पूर्ण कर संसार के लिए एक उदाहरण बने क्योंकि ईश्वर व उनके भक्तों को भी मनुष्य जन्म लेकर अनेक कठिनाईयों व चुनौतियों का सामना करना पड़ा व उन्होंने अपने मनुष्य जीवन के लक्ष्य को प्राप्त किया।
प्रस्तुति,, नरेश छाबड़ा आवास-विकास रूद्रपुर
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