
सितारगंज पिपलिया गुरुद्वारा में बड़ी धूमधाम के साथ मनाया गया होला मेला का पर्व इस अवसर पर बड़ी संख्या में संगत उपस्थित रही और गुरुद्वारा परिसर मेंभजन-कीर्तन, अरदास एवं धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित बाबा छिन्दा सिंह ने बताया कि होला मेला सिखों का एक प्रमुख त्योहार है, जिसकी शुरुआत दसवें सिख गुरु गुरु गोविंद सिंह जी ने वर्ष 1701 में की थी। यह पर्व होली से पहले मनाया जाता है और विशेष रूप से आनंदपुर साहिब में बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ आयोजित होता है उन्होंने बताया कि उस समय मुगल शासन के अत्याचार बढ़ रहे थे। ऐसे दौर में सिखों को केवल धार्मिक रूप से ही नहीं, बल्कि शारीरिक और युद्ध कौशल में भी मजबूत बनाना आवश्यक था। इसी उद्देश्य से गुरु गोविंद सिंह जी ने होली के उत्सव को वीरता के पर्व में परिवर्तित किया और होला मेला की परंपरा शुरू की होला मेला के दौरान विशेष रूप से शस्त्र प्रदर्शन, गतका, घुड़सवारी और अन्य युद्धक कलाओं का प्रदर्शन किया जाता है, जो सिखों की वीरता और साहस का प्रतीक है पिपलिया गुरुद्वारे में भी इस अवसर पर संगत ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और लंगर की व्यवस्था की गई। पूरे क्षेत्र में भक्तिमय और उत्सव का माहौल देखने को मिला।










