
रुद्रपुर के फुलसूंगा में आयोजित भागवत कथा के चौथे अध्याय (चतुर्थ स्कंध) की मुख्य बातें:
दक्ष-शिव विवाद: प्रजापति दक्ष ने एक विशाल यज्ञ किया जिसमें उन्होंने शिव और सती को आमंत्रित नहीं किया।
सती का आगमन: अपमानित महसूस करने पर भी सती शिव की अनुमति के बिना यज्ञ में जाती हैं, जहाँ उन्हें और अधिक अपमानित किया जाता है।
सती का योगाग्नि में प्राण त्याग: शिव का अपमान सहन न कर सती योगाभ्यास के माध्यम से अपने शरीर को भस्म कर देती हैं।
यज्ञ विध्वंस: सती के देह त्याग की खबर मिलते ही भगवान शिव के गण (वीरभद्र) यज्ञशाला को नष्ट कर देते हैं और दक्ष का वध कर देते हैं।
नारद का उपदेश: नारद मुनि राजा प्राचीनबर्हि को यह कथा सुनाकर कर्म और ज्ञान का मार्ग समझाते हैं, जो सांसारिक मोह को छोड़ ईश्वर की ओर बढ़ने का संदेश देता है।










