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गदरपुर। समाज में सेवा और जागरूकता का संदेश देते हुए कुमाऊँ केसरी से जुड़े फुटेला दंपत्ति ने देहदान का संकल्प लिया है। उन्होंने औपचारिक रूप से देहदान का फॉर्म भरकर यह घोषणा की कि मृत्यु के उपरांत उनका शरीर मेडिकल रिसर्च और चिकित्सा शिक्षा के कार्यों में उपयोग किया जाए। इस पहल को सामाजिक जिम्मेदारी की दिशा में एक प्रेरक कदम माना जा रहा है।
देहदान का यह संकल्प अनमोल संकल्प सिद्धि फाउंडेशन की अध्यक्षा सुचित्रा पंकज जायसवाल की उपस्थिति में लिया गया। उन्होंने स्वयं फॉर्म भरवाते हुए बताया कि समाज में अभी भी देहदान को लेकर जागरूकता की कमी है,जबकि चिकित्सा शिक्षा और शोध के लिए मानव शरीर की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उनका कहना था कि यदि अधिक लोग आगे आएं तो भविष्य के डॉक्टरों को बेहतर प्रशिक्षण मिल सकेगा और चिकित्सा अनुसंधान को नई दिशा मिलेगी।
फुटेला दंपत्ति को इस निर्णय के लिए आध्यात्मिक शिक्षक आचार्य प्रशांत जी के विचारों से प्रेरणा मिली। आचार्य प्रशांत जी अक्सर अपने प्रवचनों में कहते हैं कि “यह शरीर अंततः मिट्टी में मिल जाना है,तो क्यों न जाते-जाते किसी के काम आ जाए।” इसी सोच को आत्मसात करते हुए दंपत्ति ने सामाजिक उपयोगिता को प्राथमिकता दी। उनका मानना है कि सच्ची आध्यात्मिकता केवल विचारों तक सीमित नहीं,बल्कि व्यवहार में दिखाई देनी चाहिए।
फाउंडेशन की ओर से बताया गया कि 7 मार्च को इस मानवीय संकल्प के लिए फुटेला दंपत्ति को नैनीताल में आयोजित कार्यक्रम में सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम में नैनीताल के जिलाधिकारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे और समाज के सामने इस पहल को उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत किया जाएगा।
चिकित्सकों के अनुसार,देहदान से मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत छात्रों को मानव शरीर की संरचना को समझने का वास्तविक अवसर मिलता है। यह चिकित्सा विज्ञान के विकास की आधारशिला है।
फुटेला दंपत्ति का यह कदम न केवल एक व्यक्तिगत निर्णय है, बल्कि समाज के लिए एक संदेश भी है—जीवन के बाद भी मानव सेवा संभव है। यदि अधिक लोग इस दिशा में सोचें, तो चिकित्सा क्षेत्र को बड़ी मजबूती मिल सकती है और मानवता के प्रति उत्तरदायित्व की भावना और गहरी हो सकती है।

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