
किच्छा नगर पालिका और सिरौली कला को अलग नगरपालिका बनाए जाने के विरोध में पूर्व विधायक राजेश शुक्ला द्वारा आयोजित रोड शो और प्रदर्शन को जनता का समर्थन नहीं मिल सका। हजारों लोगों के जुटने के दावे के बावजूद प्रदर्शन में करीब 500 लोग भी शामिल नहीं हुए। एक सप्ताह तक की गई तैयारियों, घर-घर पर्चे बांटने और व्यापक प्रचार के बाद भी आयोजक जनता को अपने पक्ष में लाने में असफल रहे।
कांग्रेस पर तुष्टिकरण के आरोप लगाने वाले भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेता बेहड ने कहा कि भारतीय राजनीति में धार्मिक उन्माद फैलाने और नफरत के नारों से वोट बटोरने का खेल भारतीय जनता पार्टी ने देश-प्रदेश में चलाया है। इसके बावजूद आज वही नेता सड़कों पर उतरकर कांग्रेस पर आरोप लगा रहे हैं, जबकि कांग्रेस ने हमेशा हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई सभी को साथ लेकर चलने का काम किया है।
बेहड ने कहा कि यह प्रदर्शन पूरी तरह व्यक्तिगत था, क्योंकि इसमें भाजपा का झंडा-बैनर तक नहीं लगाया गया। पार्टी द्वारा तीन-तीन बार टिकट पाए नेता आज अपनी ही पार्टी से दूरी बनाते नजर आए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश में भाजपा की सरकार है और शासन-प्रशासन उनके हाथ में है, तो फिर उपजिलाधिकारी कार्यालय के बाहर आंसू बहाने का क्या औचित्य है?
उन्होंने बताया कि किच्छा शहर की जनता ने सिरौली कला को अलग करने के प्रस्ताव को समर्थन नहीं दिया है। जनता कानून और संविधान के साथ खड़ी है, खासकर तब जब यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। न्यायालय में लंबित विषय पर लोगों को गुमराह कर सड़कों पर लाना हास्यास्पद है।
बेहड ने आरोप लगाया कि पूर्व विधायक अपने कार्यकाल में न तो किसी मुस्लिम गांव में और न ही शहरी क्षेत्र के किसी वार्ड में कोई ठोस विकास कार्य करा पाए। चुनाव हारने के बाद अब वे एक विशेष समुदाय के सामने घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किच्छा विधानसभा की जनता छल-फरेब की राजनीति को समझ चुकी है और निजी स्वार्थ के लिए किए जा रहे ऐसे प्रयासों में आने वाली नहीं है।
अंत में बेहड ने स्पष्ट किया कि न्यायालय का जो भी फैसला आएगा, वह सभी को मान्य होगा। किच्छा और सिरौली एक रहें या अलग हों, जनता का भरोसा कांग्रेस पर है और हर स्थिति में कांग्रेस ही विजयी होगी।










