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पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद के विकास खण्ड जयहरीखाल बाजार में मंगलवार को सचिव संस्कृत,शिक्षा,जनगणना एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन विभाग दीपक कुमार की अध्यक्षता में सरकार जनता द्वार कार्यक्रम के तहत चौपाल का आयोजन किया गया। चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने सड़क,पेयजल,स्वास्थ्य और अन्य विभागों से संबंधित समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। सचिव ने सभी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे तय समय सीमा के भीतर समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करें। आयोजित चौपाल में सचिव ने कहा कि सभी विभागीय अधिकारी ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान में तत्परता और पारदर्शिता बनाए रखें। उन्होंने कहा कि चौपाल लगाने का उद्देश्य जन समस्याओं का त्वरित निवारण करना और प्रशासन व जनता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। चौपाल में कुलदीप बिष्ट ने नौगांव ग्राम सभा में उनके होमस्टे का पंजीकरण न होने,उमानंद ने रास्ता बंद,शिवानी ने मैंदोली मोटर मार्ग का मुआवजा की मांग,लिंगवाड़ा ग्राम वासियों ने पेजयल की समस्या,खूंडोली गांव में अमृत सरोवर सही नहीं बनने,भारत सिंह ने डिग्री कॉलेज का मार्ग चौड़ीकरण,प्रमोद सिंह ने बरसात में बरसाती पानी जयहरी गांव में आने की शिकायत,जयहरीखाल इंटर कॉलेज का कार्य अधूरा सहित अन्य लोगों ने अपनी-अपनी समस्या सचिव के सामने रखी। सचिव ने संबंधित शिकायतों का संज्ञान लेते हुए संबंधी अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने होमस्टे का पंजीकरण न होने पर खंड विकास अधिकारी जयहरीखाल व दुगड्डा की अध्यक्षता में कमेठी गठित कर संबंधित होमस्टे का निरीक्षण करते हुए उनका समाधान करने के निर्देश दिए हैं। वहीं रास्ता बंद होने की शिकायत पर सचिव ने राजस्व उप निरीक्षक को  तत्काल रास्ता खुलवाने को कहा। उन्होंने सहायक अभियंता लोनिवि को निर्देश दिए की मैंदोली मोटर मार्ग का मुआवजा  ग्रामीणों को मिले इसके लिए आवश्यक कार्रवाई करना सुनिश्चित करें। इसके अलावा लिंगवाड़ा गांव में पेयजल की शिकायत पर उन्होंने पेयजल विभाग को ग्रामीणों को पुरानी पेयजल लाइन से एक सप्ताह के अंदर पानी देने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने पेयजल निगम के अधीक्षण अभियंता को निर्देश दिए कि जयहरीखाल पंपिंग योजना का निरीक्षण कर उसका समाधान करना सुनिश्चित करें। राजकीय इंटर कॉलेज जयहरीखाल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ना होने की शिकायत पर उन्होंने संबंधित विभाग को शिक्षा महानिदेशक को पत्राचार करने के निर्देश दिए। साथ ही कॉलेज का कार्य अधूरे होने की शिकायत पर उन्होंने महानिदेशक शिक्षा व हंस फाउंडेशन को एक सप्ताह के अंदर बैठक कर आगे की कार्यवाही करने को कहा। खूंडोली गांव में अमृत सरोवर  का कार्य संतोष जनक नहीं होने की शिकायत पर उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी को जांच करने के निर्देश दिए हैं। वहीं जंगली जानवरों से निजात दिलाने की शिकायत पर उन्होंने वन विभाग को आवश्यक कार्यवाही करने को कहा। मोटर मार्ग का बरसाती पानी जयहरी गांव में आने की शिकायत पर उन्होंने खंड विकास अधिकारी जयहरीखाल को तत्काल उसका निस्तारण करने के निर्देश दिए। सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि चौपाल में जो समस्याएं ग्रामीणों द्वारा रखी गई हैं उनका समाधान समय पर पूर्ण करना सुनिश्चित करें,जिससे ग्रामीणों को उसका लाभ समय पर मिल सकेगा। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि समस्त अधिकारी जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुने और मौके पर ही उनका समाधान करना सुनिश्चित करें। जिससे लोगों को मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। चौपाल के बाद उन्होंने राजकीय इंटर कॉलेज जयहरीखाल का निरीक्षण भी किया। चौपाल में प्रशिक्षु आईएएस व लेंसडौन तहसीलदार दीक्षिता जोशी,जिला पर्यटन अधिकारी खुशाल सिंह नेगी,अधिशासी अभियंता पेयजल अजय बेलवाल,खंड शिक्षा अधिकारी अमित कुमार,खंड विकास अधिकारी रवि सैनी,एसडीओ विद्युत चंद्रमोहन,पशु चिकित्साधिकारी डॉ.अमित कुमार,एडीओ सहकारिता रविंद्र सिंह,एसएचओ लेंसडौन मो.अकरम,वन दरोगा रमेश चंद्र सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

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राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहासलाल बिहारी लालसदियों की गुलामी के बाद आजादी की पहली मांग सन् 1857 ईस्वी में पुरजोर तरीके से उठी उसी समय राष्ट्र के ध्वज बनाने की योजना बनी परंतु पहले स्वतंत्रता संघर्ष के परिणाम को देखकर झंडे की मांग बीच में ही अटक गई । वर्तमान स्वरूप में विद्यमान झंडा कई चरणों से होकर गुजरा है । प्रथम चित्रित ध्वज स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता द्वारा 1904 में बनाया गया था औऱ इसे 7 अगस्त 1906 के कोलकाता में कांग्रेस के अधिवेशन में फहराया गया था ।इस ध्वज को क्षैतिज तीन रंगो लाल, पीला एवं हरे रंग की क्षौतिज पट्टियां बनाया गया था ।ऊपर की ओर हरी पट्टी में आठ कमल थे जिनका रंग सफेद था , नीचे की लाल पट्टी में सूरज और चांद बनाए गए सफेद रंग से बनाये गए थे बीच की पीली पट्टी पर नीले रंग से वंदे मातरम लिखा गया था।द्वितीय ध्वज की बात करें तो सन 1907 ईस्वी में मैडम भीका जी कामा और कुछ अन्य निर्वाचित क्रांतिकारियों ने मिल कर पेरिस में पहली बार फहराया था। तृतीय चित्र ध्वज की बात करें तो 1917 ईस्वी में राजनीतिक संघर्ष के दौरान एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन के दौरान फहराया था। इस ध्वज में पांच लाल और चार हरे क्षैतिज पट्टियां एक के बाद एक और सप्तऋषि के अभिविन्यास में इस पर सात सितारे बने थे ।ऊपरी किनारे पर बायी और यूनियन जैक था । उपर दायी तरफ एक कोने में सफेद अर्द्धचंद्र और सितारा भी था । कांग्रेस के विजयवाड़ा अधिवेशन में एक युवक पिंगली वेंकैया ने एक चौथा झंडा बनाया था जिसमें दो रंगों का लाल और हरा रंग का था जो दो प्रमुख समुदाय अर्थात हिंदू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्व करता था गांधी जी ने 1921 ईस्वी में सुझाव दिया कि भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसे एक सफेद पट्टी मध्य में और सफेद पट्टी के बीच में प्रगति के लिए चलता हुआ चरखा होना चाहिए। वर्ष 1931 में झंडा के इतिहास में एक नया मोड़ आया तिरंगे ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाने का एक प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें तीन रंग उपर केसरिया बलिदान का प्रतीक बीच में सफेद शांति का प्रतिक और अशोक स्तंभ से लिया चक्र इसे विधि चक्र भी कहते हैं जिसमें 24 तिल्लिया प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देती है और सबसे नीचे हरा रंग हरियाली एवं खुशहाली का प्रतीक । तीनों पट्टियां समानुपात में आयताकार जिसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2है। इसे राष्ट्रध्वज के रूप में मान्यता मिली 22 जुलाई 1947 ई. को संविधान सभा ने वर्तमान भारत के तिरंगा को भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया तथा आजादी के बाद भी इसका रंग और महत्व आज भी बना हुआ है ।इस ध्वज को आज 26 जनवरी 1950 को संवैधानिक मान्यता प्राप्त हुआ। ये था राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहास ।

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