Spread the love

हरियाणा में सरकारी शिक्षण संस्थानों में पदों का अंबार, पर खाली रहते हैं लगातार: शिक्षा के निजीकरण पर समाज सेवी राजबीर सिंह भारतीय ने उठाए गंभीर सवाल:स्कूल: प्रदेश के सैकड़ों स्कूलों में एक भी नियमित शिक्षक नहीं होना शिक्षा के अधिकार (RTE) का सीधा उल्लंघन है:

काशीपुर -हरियाणा के पूर्व सेवानिवृत्त अधीक्षक (एडवोकेट जनरल कार्यालय) एवं प्रसिद्ध समाजसेवी श्री राजबीर सिंह भारतीय ने प्रदेश की चरमराती शिक्षा व्यवस्था पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि सरकारी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों में शिक्षकों और गैर-शिक्षण स्टाफ के हजारों पद रिक्त होना प्रदेश के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

आंकड़ों की जुबानी, बदहाली की कहानी:

​श्री राजबीर सिंह भारतीय ने आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि:

​कुल स्वीकृत पद: लगभग 1,22,359 (सभी श्रेणियों – PRT, TGT, PGT को मिलाकर)।
​कार्यरत शिक्षक: वर्तमान में लगभग 92,500 से 95,000 के बीच शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें नियमित (Regular) और अतिथि अध्यापक (Guest Teachers) दोनों शामिल हैं।
​रिक्त पद: मार्च 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 17,000 से 29,000 पद रिक्त बताए गए हैं।
​PGT (Post Graduate Teachers): ~8,519 रिक्त पद।
​TGT (Trained Graduate Teachers): ~4,583 रिक्त पद।
​PRT (Primary Teachers): ~2,557 रिक्त पद।
टीजीटी और पीजीटी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भर्ती न होने से बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी प्रभावित हो रही है।

गैर-शिक्षण स्टाफ (Non-Teaching Staff)
​गैर-शिक्षण कर्मचारियों में क्लर्क, लैब सहायक, और चतुर्थ श्रेणी (Group D) के कर्मचारी शामिल हैं:
​रिक्तियां: * क्लर्क (Clerks): लगभग 686 पद रिक्त हैं।
​चतुर्थ श्रेणी (Class IV): लगभग 4,134 पद रिक्त हैं।
नॉन-टीचिंग स्टाफ: क्लर्क, लैब सहायक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के हजारों पद खाली होने से प्रशासनिक व्यवस्था ठप है।

उच्च शिक्षा (कॉलेज): हरियाणा के राजकीय महाविद्यालयों में भी असिस्टेंट प्रोफेसरों के लगभग 4,000 से अधिक पद खाली हैं।
​विश्वविद्यालय: प्रदेश की प्रमुख यूनिवर्सिटीज में शोध और उच्च शिक्षा के लिए आवश्यक शैक्षणिक स्टाफ की भारी कमी है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता गिर रही है।

“गरीब की जेब पर डाका और निजीकरण की साजिश”
​समाजसेवी राजबीर सिंह ने कड़े शब्दों में कहा, “जब सरकारी संस्थानों में गुरु ही नहीं होंगे, तो शिष्य आगे कैसे बढ़ेंगे? पदों को खाली रखकर सरकार अप्रत्यक्ष रूप से निजी स्कूलों और निजी विश्वविद्यालयों को बढ़ावा दे रही है। यह गरीब जनता की जेब पर सीधा डाका है, क्योंकि उन्हें मजबूरी में अपने बच्चों को भारी-भरकम फीस वाले निजी संस्थानों में भेजना पड़ रहा है।”
​उन्होंने आगे कहा कि यदि यही स्थिति रही, तो गरीब और वंचितवर्ग का बच्चा शिक्षा से पूरी तरह महरूम रह जाएगा। सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि क्या यह सब जान-बूझकर सरकारी तंत्र को विफल करने के लिए किया जा रहा है ताकि बड़े कॉरपोरेट घरानों के निजी शिक्षण संस्थानों का व्यापार फल-फूल सके?

राजबीर सिंह भारतीय ने हरियाणा शिक्षा विभाग की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने विभाग की ‘चिराग योजना’ (CHIRAG Scheme) और सरकारी स्कूलों-कॉलेजों में खाली पड़े हजारों पदों को ‘गरीब बच्चों के भविष्य के साथ भद्दा मजाक’ करार दिया है।

​”सरकारी तंत्र को खोखला करने की साजिश”
​श्री राजबीर सिंह भारतीय ने प्रेस नोट में कहा, “हरियाणा शिक्षा विभाग में आज 29,000 से अधिक शिक्षकों (PGT/TGT/PRT) और हजारों गैर-शिक्षण स्टाफ (Non-Teaching Staff) के पद खाली पड़े हैं। लैब अटेंडेंट और क्लर्कों की कमी के कारण स्कूलों और कार्यालयों का प्रशासनिक ढांचा पंगु हो चुका है। सरकार जानबूझकर इन पदों को नहीं भर रही ताकि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को ‘बीमार’ घोषित कर निजी स्कूलों का रास्ता साफ किया जा सके।”

​चिराग योजना और टैबलेट वितरण पर तीखा प्रहार:
​प्रेस विज्ञप्ति में भारतीय ने विभाग की प्रमुख योजनाओं की पोल खोलते हुए कहा:

​चिराग योजना (CHIRAG): यह योजना सरकारी स्कूलों से बच्चों को निकालकर प्राइवेट स्कूलों में भेजने का एक ‘सरकारी लाइसेंस’ है। गरीब बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में भेजने के नाम पर सरकार अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रही है।

​टैबलेट वितरण: स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, लेकिन टैबलेट बांटे जा रहे हैं। बिना गुरु के केवल गैजेट्स से शिक्षा कैसे संभव है? यह जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी और निजी कंपनियों को फायदा पहुँचाने की रणनीति है।

​सरकार से सीधे सवाल:

​श्री भारतीय ने पूछा, “क्या सरकार की मंशा प्राइवेट स्कूल, कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज के व्यापार को फलने-फूलने का अवसर देना है? जब शिक्षा विभाग में पद खाली हैं, तो गरीब बच्चा डॉक्टर या इंजीनियर बनने का सपना कैसे देखेगा? यह गरीब और मध्यम वर्ग की जेब पर भारी डाका है।”

प्रमुख मांगें:
​रिक्त पड़े सभी टीचिंग और नॉन-टीचिंग पदों पर स्थायी भर्ती तुरंत शुरू की जाए।
​कौशल रोजगार निगम (HKRN) जैसी ‘कच्ची’ भर्तियों के बजाय पक्की नियुक्तियों को प्राथमिकता दी जाए।

​शिक्षा के बजट को बढ़ाकर सरकारी बुनियादी ढांचे को निजी स्कूलों के समकक्ष लाया जाए।

​श्री राजबीर सिंह भारतीय ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए, तो प्रदेश के जागरूक नागरिक और समाजसेवी संस्थाएं सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगी।

​चेतावनी और मांगें:
​नियमित भर्ती: हरियाणा शिक्षा विभाग तुरंत पक्की भर्तियों का विज्ञापन जारी करे।
​चिराग योजना की समीक्षा: सरकारी स्कूलों को मजबूत किया जाए न कि बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में धकेला जाए।
​बुनियादी ढांचा: कौशल रोजगार निगम (HKRN) जैसी ‘कच्ची नौकरियों’ को बंद कर युवाओं को स्थायी रोजगार दिया जाए।
​श्री राजबीर सिंह भारतीय ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने शिक्षा के इस निजीकरण और विभाग की लापरवाही पर लगाम नहीं लगाई, तो वे प्रदेश स्तर पर अभिभावकों और युवाओं को लामबंद कर एक बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।


You cannot copy content of this page