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हरिद्वार।उत्तराखंड पुलिस देहरादून परेड ग्राउंड में हम (उत्तराखंड दिव्यांग क्रांति महाआंदोलन के पदाधिकारियों) सभी आंदोलनकारी व क्रांतिकारी मूक बधिर और दिव्यांगजनो को धरना करने नहीं दे रही। हमारे संगठन हमने धरने की सूचना प्रशासन को दे दी थी। देवभूमि बधिर एसोसिएशन के लेटर पैड धरने का परमिशन भी दिखाया गया लेकिन पुलिस हमारी सुन नहीं रही। हम सभी को करनपुर चौकी ले गए। हमे चौथी बार हिरासत में लिया गया। क्या मूक बधिर और दिव्यांगजनो की जायज मांगों के लिए धरना करना नाजायज है। हमे केवल शांतिपूर्ण ढंग से धरने करना था, वो भी करने नहीं दिया गया। हमारी इच्छा बस इतना है कि दिव्यांगजनो की मांग पूरी हो। हमे धरने की सरदर्द लेने की जरूरत क्या थी। धरने में संदीप अरोड़ा, विपिन चौहान, उमेश ग्रोवर, सोनिया अरोड़ा, अपूर्व नौटियाल, बबीता तंवर, विनीता, बीना, ललिता, अंकित भटनागर, संजय नेगी, भारत भूषण। छत्रपाल, इस्लामुद्दीन, सचिन रौथान, विपिन थपलियाल, विजय भट्ट, शैलेन्द्र आदि शामिल रहे। उधर हमारे साथी उमेश ग्रोवर को घर से बिदाल कोतवाली ले गए और अरुण चौधरी को उनके गांग भोवावाली से हिरासत में लिया गया। गौरतलब है कि 8 सितंबर को प्रदेश भर के 500 से अधिक दिव्यांगजनो ने सीएम आवास कूच किया था। पुलिस ने सभी दिव्यांगजनो को गिरफ्तार किया था और हर्रा वाला पुलिस चौकी छोड़ा था। उसके बाद भी दिव्यांगजनो को आंदोलन के लिए देहरादून जाते समय 3 बार हिरासत मे लिया गया था। मूक बधिर और दिव्यांगजनो ने अपनी 15 सूत्रीय मांगो को लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ आंदोलन किया।

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