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उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावो की तैयारी के लिए कांग्रेस हाईकमान अपने सभी जिला और महानगर अध्यक्षों को धार देने में लगी हुई है। हरियाणा के कुरुक्षेत्र में विगत 13 जनवरी से आयोजित 10 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के नेताओं ने जिला और महानगर अध्यक्षों को 2027 में भाजपा की चुनौती को दरकिनार कर उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार बनाने के लिए अपने टिप्स दिए। प्रशिक्षण कार्यशाला में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, राष्ट्रीय महासचिव कुमारी शैलजा, कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी और सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला, प्रशिक्षण शिविर के राष्ट्रीय संयोजक सचिन राव, एआईसीसी कोऑर्डिनेटर के.राजू, राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी, राष्ट्रीय महासचिव बी. के. हरिप्रसाद,राष्ट्रीय सचिव काजी निजामुद्दीन,जितेंद्र बघेल, सुरेंद्र शर्मा, तमिलनाडु के सांसद श्रीकांत सेंथिल, हरियाणा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह, महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य आदि सहित दिग्गज नेताओं ने जिला और महानगर अध्यक्षों को कांग्रेस की संघटनात्मक रूपरेखा, इतिहास, राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के ज्वलंत मुद्दों, बूथ स्तर तक संगठन की तैयारी जैसे गंभीर विषयों का आदान-प्रदान किया। कार्यशाला में भाग ले रही महानगर कांग्रेस कमेटी काशीपुर की अध्यक्ष अलका पाल ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यशाला में उत्तराखंड के सभी जनपदों के जिला अध्यक्षों के साथ कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के द्वारा संवाद और विचारों का आदान-प्रदान कर भविष्य की मजबूत आधारशिला के लिए एक प्रेरक का कार्य किया है। जो कि निश्चित ही 10 दिवसीय शिविर में सभी जिला महानगर अध्यक्षों को आगामी विधानसभा चुनाव की चुनौती से लड़ने में मिल का पत्थर साबित होगी।

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राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहासलाल बिहारी लालसदियों की गुलामी के बाद आजादी की पहली मांग सन् 1857 ईस्वी में पुरजोर तरीके से उठी उसी समय राष्ट्र के ध्वज बनाने की योजना बनी परंतु पहले स्वतंत्रता संघर्ष के परिणाम को देखकर झंडे की मांग बीच में ही अटक गई । वर्तमान स्वरूप में विद्यमान झंडा कई चरणों से होकर गुजरा है । प्रथम चित्रित ध्वज स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता द्वारा 1904 में बनाया गया था औऱ इसे 7 अगस्त 1906 के कोलकाता में कांग्रेस के अधिवेशन में फहराया गया था ।इस ध्वज को क्षैतिज तीन रंगो लाल, पीला एवं हरे रंग की क्षौतिज पट्टियां बनाया गया था ।ऊपर की ओर हरी पट्टी में आठ कमल थे जिनका रंग सफेद था , नीचे की लाल पट्टी में सूरज और चांद बनाए गए सफेद रंग से बनाये गए थे बीच की पीली पट्टी पर नीले रंग से वंदे मातरम लिखा गया था।द्वितीय ध्वज की बात करें तो सन 1907 ईस्वी में मैडम भीका जी कामा और कुछ अन्य निर्वाचित क्रांतिकारियों ने मिल कर पेरिस में पहली बार फहराया था। तृतीय चित्र ध्वज की बात करें तो 1917 ईस्वी में राजनीतिक संघर्ष के दौरान एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन के दौरान फहराया था। इस ध्वज में पांच लाल और चार हरे क्षैतिज पट्टियां एक के बाद एक और सप्तऋषि के अभिविन्यास में इस पर सात सितारे बने थे ।ऊपरी किनारे पर बायी और यूनियन जैक था । उपर दायी तरफ एक कोने में सफेद अर्द्धचंद्र और सितारा भी था । कांग्रेस के विजयवाड़ा अधिवेशन में एक युवक पिंगली वेंकैया ने एक चौथा झंडा बनाया था जिसमें दो रंगों का लाल और हरा रंग का था जो दो प्रमुख समुदाय अर्थात हिंदू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्व करता था गांधी जी ने 1921 ईस्वी में सुझाव दिया कि भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसे एक सफेद पट्टी मध्य में और सफेद पट्टी के बीच में प्रगति के लिए चलता हुआ चरखा होना चाहिए। वर्ष 1931 में झंडा के इतिहास में एक नया मोड़ आया तिरंगे ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाने का एक प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें तीन रंग उपर केसरिया बलिदान का प्रतीक बीच में सफेद शांति का प्रतिक और अशोक स्तंभ से लिया चक्र इसे विधि चक्र भी कहते हैं जिसमें 24 तिल्लिया प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देती है और सबसे नीचे हरा रंग हरियाली एवं खुशहाली का प्रतीक । तीनों पट्टियां समानुपात में आयताकार जिसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2है। इसे राष्ट्रध्वज के रूप में मान्यता मिली 22 जुलाई 1947 ई. को संविधान सभा ने वर्तमान भारत के तिरंगा को भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया तथा आजादी के बाद भी इसका रंग और महत्व आज भी बना हुआ है ।इस ध्वज को आज 26 जनवरी 1950 को संवैधानिक मान्यता प्राप्त हुआ। ये था राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहास ।

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