Spread the love

जिस देश की नारी सड़कों पर,उसे देश का आलम क्या होगा

काशीपुर : भोजन माताओं की मांगों के समर्थन में कांग्रेस ने भी मोर्चा खोल दिया। महानगर कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष अलका पाल ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि भोजन माताओं को नियमित ना करना सरकार का नारी विरोधी चेहरा दिखाता है। भोजन माताओ को मिलने वाला मानदेय उनकी मेहनत और जिम्मेदारी के अनुरूप नहीं है। वर्षों से भोजन माताएं सीमित आय में कार्य कर रही है, इससे उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। बच्चों को समय पर भोजन उपलब्ध कराने जैसे संवेदनशील कार्य के बावजूद भोजन माताओ को ऐसा मानदेय दिया जा रहा है, जिससे परिवार का न्यूनतम खर्च भी पूरा नहीं हो पा रहा। कांग्रेस नेत्री अलका पाल ने कहा कि वर्तमान मानदेय  महंगाई के अनुरूप में अत्यंत कम है। खाद्य पदार्थ, ईंधन, शिक्षा और स्वास्थ्य खर्चे में लगातार वृद्धि हो रही है, जबकि मानदेय में कोई स्थाई सुधार नहीं दिख रहा। इससे भोजन माताओ को कर्ज लेने और उधार पर जीवन व्यतीत करने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है। शासन की ओर से घोषित मानदेय को व्यवहार में लागू न किए जाने से आर्थिक  अस्थिरता और बढ़ गई है। भुगतान की कोई निश्चित तिथि न होने से बार-बार महीना तक मानदेय तक नहीं मिल पाता और घर का बजट बिगड़ जाता है। बच्चों की पढ़ाई व इलाज जैसी जरूरी खर्च भी प्रभावित होते हैं, यदि मानदेय सम्मानजनक स्तर पर तय किया जाए तो वह अपने परिवार का भरण_ पोषण आत्म सम्मान के साथ कर सकती हैं। अलका पाल ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि जब शासन से पांच हजार मासिक मानदेय घोषित है तो तीन हजार रूपए उनको क्यों दिए जा रहे हैं, यह दो हजार रूपए आखिर कहां जा रहे हैं ? यह जांच का विषय है। शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होने का बावजूद उन्हें ना तो चतुर्थ कर्मचारी तक  का दर्जा दिया गया, ना ही स्थायित्व की कोई नीति बनाई गई। कांग्रेस भोजन माताओ को न्याय दिलाने  तक उनके हकों की लड़ाई रहेगी।

You cannot copy content of this page