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गदरपुर । पालिका चुनाव में नाम वापसी के उपरांत पालिका अध्यक्ष प्रत्याशी पांच उम्मीदवार चुनाव मैदान में रह गए हैं 11 वार्डों के 17 उम्मीदवारों द्वारा नाम वापसी के उपरांत 47 वार्ड प्रत्याशी मैदान में चुनाव मैदान में है । पालिका अध्यक्ष प्रत्याशी भाजपा, कांग्रेस और बसपा के अलावा दो निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में डटे हैं वहीं भाजपा की बागी उम्मीदवार पूर्व पालिका अध्यक्ष अंजू भुड्डी एवं सोनू कुमारी ने सहमति के उपरांत अपना नामांकन वापस ले लिया है । पालिका प्रत्याशियों में कांग्रेस की चंद्रा जोशी, भाजपा के मनोज गुंबर ,बसपा के इस्लाम सैफी, निर्दलीय जुल्फिकार अली एवं अफरोज जहां चुनाव मैदान में हैं। वार्ड नंबर 1 पिछड़ी जाति प्रत्याशी राहुल, शाइस्ता ,भाजपा राधा मौर्य, कांग्रेस सतीश, निर्दलीय जुनैद एवं नगमा । वार्ड नंबर 2 अनुसूचित जाति कशिश के नाम वापसी के बाद भाजपा सरिता, कांग्रेस नरगिस एवं मंजू । वार्ड नंबर 3 सामान्य किशन गुप्ता, गोपाल सिंह, रितिक द्वारा नाम वापसी के बाद भाजपा सचिन कांग्रेस ऋषभ,आम आदमी पार्टी मुजम्मिल हुसैन,निर्दलीय अनिल कुमार पुत्र लखीचंद,अनिल कुमार पुत्र शिव शंकर एवं कृपाली सिंह। वार्ड चार सामान्य भाजपा रजत, कांग्रेस मनमीत सिंह ,निर्दलीय अमरजीत सिंह, जगदीश ,सुनील कंबोज । वार्ड 5 सामान्य राहुल कम्बोज द्वारा नाम वापसी के बाद भाजपा परमजीत सिंह, कांग्रेस शैलेंद्र शर्मा, निर्दलीय रजत प्रताप सिंह एवं सौरभ शर्मा । वार्ड 6 सामान्य उपदेश अरोड़ा नाम वापसी के बाद भाजपा रमन छाबड़ा,कांग्रेस पंकज कांडपाल एवं एक निर्दलीय । वार्ड नंबर 7 सामान्य सचिन बत्रा नाम वापसी के बाद भाजपा संदीप बत्रा,कांग्रेस मुकेश ,निर्दलीय मो.फहीम । वार्ड नंबर 8 पिछड़ी जाति भाजपा मोहिनी कुमारी ,कांग्रेस खुश रबी, निर्दलीय तबस्सुम । वार्ड नंबर 9 पिछड़ी जाति इम्तियाज,मो. मोमिन, सिराजुल द्वारा नाम वापसी के बाद भाजपा मीनाक्षी, कांग्रेस फरदीन, निर्दलीय अनीता, आलिया, इब्ने हसन दीक्षा श्रीवास्तव, नूर हसन एवं फरदीन । वार्ड नंबर 10 सामान्य महिला कुलसुम एवं फरहा नाज द्वारा नाम वापसी के बाद भाजपा रीना नागपाल, कांग्रेस लीना झाम, ममता धवन,मुनीबा एवं शबाना । वार्ड नंबर 11 पिछड़ी जाति अफसाना ,चंद्रिका, मुन्नी भी द्वारा नाम वापसी के बाद भाजपा प्रीति चौधरी, कांग्रेस विनीता, प्रियंका चंद्रा एवं शन्नो बेगम चुनाव मैदान में हैं। पालिका अध्यक्ष प्रत्याशियों एवं वार्ड सभासद प्रत्याशियों द्वारा चुनाव प्रचार तेज करके घर-घर जाकर संपर्क करने के साथ मतदाताओं को तरह-तरह से लुभाए जाने के प्रयास किये जा रहे हैं ।

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राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहासलाल बिहारी लालसदियों की गुलामी के बाद आजादी की पहली मांग सन् 1857 ईस्वी में पुरजोर तरीके से उठी उसी समय राष्ट्र के ध्वज बनाने की योजना बनी परंतु पहले स्वतंत्रता संघर्ष के परिणाम को देखकर झंडे की मांग बीच में ही अटक गई । वर्तमान स्वरूप में विद्यमान झंडा कई चरणों से होकर गुजरा है । प्रथम चित्रित ध्वज स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता द्वारा 1904 में बनाया गया था औऱ इसे 7 अगस्त 1906 के कोलकाता में कांग्रेस के अधिवेशन में फहराया गया था ।इस ध्वज को क्षैतिज तीन रंगो लाल, पीला एवं हरे रंग की क्षौतिज पट्टियां बनाया गया था ।ऊपर की ओर हरी पट्टी में आठ कमल थे जिनका रंग सफेद था , नीचे की लाल पट्टी में सूरज और चांद बनाए गए सफेद रंग से बनाये गए थे बीच की पीली पट्टी पर नीले रंग से वंदे मातरम लिखा गया था।द्वितीय ध्वज की बात करें तो सन 1907 ईस्वी में मैडम भीका जी कामा और कुछ अन्य निर्वाचित क्रांतिकारियों ने मिल कर पेरिस में पहली बार फहराया था। तृतीय चित्र ध्वज की बात करें तो 1917 ईस्वी में राजनीतिक संघर्ष के दौरान एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन के दौरान फहराया था। इस ध्वज में पांच लाल और चार हरे क्षैतिज पट्टियां एक के बाद एक और सप्तऋषि के अभिविन्यास में इस पर सात सितारे बने थे ।ऊपरी किनारे पर बायी और यूनियन जैक था । उपर दायी तरफ एक कोने में सफेद अर्द्धचंद्र और सितारा भी था । कांग्रेस के विजयवाड़ा अधिवेशन में एक युवक पिंगली वेंकैया ने एक चौथा झंडा बनाया था जिसमें दो रंगों का लाल और हरा रंग का था जो दो प्रमुख समुदाय अर्थात हिंदू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्व करता था गांधी जी ने 1921 ईस्वी में सुझाव दिया कि भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसे एक सफेद पट्टी मध्य में और सफेद पट्टी के बीच में प्रगति के लिए चलता हुआ चरखा होना चाहिए। वर्ष 1931 में झंडा के इतिहास में एक नया मोड़ आया तिरंगे ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाने का एक प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें तीन रंग उपर केसरिया बलिदान का प्रतीक बीच में सफेद शांति का प्रतिक और अशोक स्तंभ से लिया चक्र इसे विधि चक्र भी कहते हैं जिसमें 24 तिल्लिया प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देती है और सबसे नीचे हरा रंग हरियाली एवं खुशहाली का प्रतीक । तीनों पट्टियां समानुपात में आयताकार जिसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2है। इसे राष्ट्रध्वज के रूप में मान्यता मिली 22 जुलाई 1947 ई. को संविधान सभा ने वर्तमान भारत के तिरंगा को भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया तथा आजादी के बाद भी इसका रंग और महत्व आज भी बना हुआ है ।इस ध्वज को आज 26 जनवरी 1950 को संवैधानिक मान्यता प्राप्त हुआ। ये था राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहास ।

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